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पूर्व बांग्लादेशी अफसर की मौत: दोस्त ने बताई उस रात की कहानी, शेख हसीना और रॉ से क्या था संबंध? कई बड़े खुलासे

Fri, 30 Oct 2026 09:19 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

बांग्लादेशी पूर्व वायुसेना अधिकारी तहसीफ सूरी की मौत के मामले में दोस्त शाहारियर दीप ने दावा किया है कि कुछ लोग उनका पीछा कर रहे थे और तहसीफ नदी में कूद गए। लेकिन दीप का बयान पहले की कहानी से अलग है। तहसीफ ने मौत से पहले शेख हसीना के देश छोड़ने के वीडियो और रॉ के आरोपों पर क्या कहा था? क्या उनकी मौत के पीछे कोई साजिश थी? आइए, विस्तार से परत दर परत इस मामले को विस्तार से जानते हैं...

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पूर्व वायु सेना अधिकारी की मौत पर सवाल? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बांग्लादेश वायुसेना के पूर्व अधिकारी तहसीफ सूरी की मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है। अब उनके साथ घटना वाली रात मौजूद रहे दोस्त शाहारियर दीप ने पुलिस को बताया है कि कुछ लोग उनका पीछा कर रहे थे। इसी दौरान तहसीफ नदी में कूद गए और वह खुद वहां से भाग निकला। दीप के इस बयान ने मामले में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि उसने पहले पत्रकारों को घटना की दूसरी कहानी बताई थी। वहीं, तहसीफ की मौत के बाद उनका यानी तहसीफ का ही पुराना पॉडकास्ट इंटरव्यू भी फिर चर्चा में है। इसमें उन्होंने शेख हसीना के देश छोड़ने के वीडियो और रॉ से कथित संबंधों के आरोपों पर अपनी बात रखी थी।
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28 वर्षीय तहसीफ सूरी बांग्लादेश वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट थे। उन्हें शेख हसीना की सरकार गिरने के करीब एक साल बाद अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया गया था। वह 27 अक्तूबर की शाम घर से निकले थे और इसके बाद लापता हो गए। अगले दिन यानी 28 अक्तूबर को शाम करीब 4:30 बजे उनका शव ढाका में तुराग नदी के राजाबाड़ी घाट के पास मिला। शव के पास मिले आईफोन और कलाई घड़ी से उनकी पहचान हुई। अब पुलिस ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी पीबीआई उनकी मौत की अलग से जांच कर रहा है। नौसेना पुलिस भी इस मामले की जांच कर रही है। जांच का एक बड़ा हिस्सा उनके दोस्त दीप के बयान और घटना वाली रात दोनों के साथ हुई गतिविधियों पर केंद्रित है।

दोस्त ने पुलिस को उस रात की क्या कहानी बताई?
पीबीआई की पूछताछ में शाहारियर दीप ने बताया कि वह और तहसीफ घटना वाली जगह पर बातचीत कर रहे थे। तभी कुछ लोग उनका पीछा करने लगे। दीप के मुताबिक, पीछा किए जाने के दौरान तहसीफ नदी में कूद गए, जबकि वह खुद वहां से भाग निकला। पीबीआई के एक पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी ने दीप के बयान की जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि जांच एजेंसी इस बयान को मौके पर मिली दूसरी जानकारियों के साथ मिलाकर देख रही है। इसके लिए दीप को साथ लेकर रातभर कई जगहों पर जांच की गई। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों का पीछा कौन कर रहा था और तहसीफ नदी में किन परिस्थितियों में कूदे थे। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि दीप का बयान कितना सही है।
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दीप के पहले और अब के बयान में क्या अंतर आया?
दीप ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया था कि वह और तहसीफ एक गैराज गए थे। इसके बाद दोनों ने ढाका के उत्तरा इलाके के हाउस बिल्डिंग क्षेत्र में साथ खाना खाया। खाना खाने के बाद दोनों अलग हो गए थे। दीप ने यह भी कहा था कि घर लौटने के बाद उसने तहसीफ को फोन किया, लेकिन उनका मोबाइल बंद मिला। अब पूछताछ में उसने बताया कि कुछ लोग दोनों का पीछा कर रहे थे और तहसीफ नदी में कूद गए। दोनों बयानों में साफ अंतर है। पीबीआई अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दीप ने पहले अलग जानकारी क्यों दी थी। दीप घटना से पहले करीब छह घंटे तक तहसीफ के साथ था। इसलिए जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि तहसीफ के लापता होने और उनकी मौत में दीप की कोई भूमिका तो नहीं थी। हालांकि, अभी उसके शामिल होने का कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

पीबीआई ने दीप को कहां से उठाया और क्या कार्रवाई की?
पीबीआई ने शुक्रवार को पुष्टि की कि दीप से पूछताछ की गई है। उसे गुरुवार रात ढाका के मोहम्मदपुर इलाके में बाबर रोड स्थित उसके घर से पीबीआई के ढाका मेट्रो नॉर्थ कार्यालय ले जाया गया था। पीबीआई प्रमुख और अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक मुस्तफा कमाल ने कहा कि दीप को हिरासत में लेने के बाद कई अहम जानकारियां मिली हैं। हालांकि, एजेंसी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है या नहीं। पीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, दीप के बयान की मौके पर जाकर जांच की जा रही है। इसके साथ ही तकनीकी विश्लेषण के जरिए भी जानकारी जुटाई जा रही है। दूसरी ओर, दीप के घर पर परिवार का कोई सदस्य नहीं मिला। वहां तैनात सुरक्षा कर्मचारियों ने बताया कि दीप छात्र है और उन्हें तहसीफ के साथ उसकी दोस्ती के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। कर्मचारियों के मुताबिक, दीप घटना वाली रात करीब 2:30 बजे घर लौटा था।

तहसीफ के परिवार को हत्या का शक क्यों है?
तहसीफ के पिता केएम एनायतुल करीम को शक है कि उनके बेटे की हत्या की गई है। उन्होंने बताया कि 27 अक्तूबर को तहसीफ ने पूरा दिन परिवार के लिए खरीदारी की थी। इसके बाद वह शाम को घर से निकला। रात करीब 1:35 बजे उसने अपनी मां को संदेश भेजा था, जिसमें लिखा था, 'मां, मैं आ रहा हूं।' इसके बाद उसका मोबाइल फोन बंद हो गया। सुबह करीब 5:15 बजे परिवार को पुलिस से सूचना मिली कि तहसीफ का शव मिल गया है। पिता ने यह भी कहा कि उनका बेटा पहले कभी राजाबाड़ी घाट इलाके में नहीं गया था। इसी वजह से उन्हें उसकी मौत पर शक है। पुलिस के शुरुआती निरीक्षण में शव पर बाहरी चोट के निशान नहीं मिले थे, हालांकि नाक से खून निकल रहा था। शव को पोस्टमार्टम के लिए शहीद सुहरावर्दी मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। फिलहाल मौत की असली वजह पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

शेख हसीना के वीडियो और रॉ के आरोपों पर क्या बोले थे तहसीफ?
तहसीफ की मौत के बाद उनका पॉडकास्ट इंटरव्यू भी चर्चा में है। इसमें उन्होंने उन आरोपों पर सवाल उठाए थे कि पांच अगस्त 2024 को शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने का वीडियो उन्होंने रिकॉर्ड करके फैलाया था। इंटरव्यू में होस्ट ने एक मीडिया रिपोर्ट का जिक्र किया था। इसमें दावा किया गया था कि वीडियो कुर्मीटोला हवाई अड्डे पर रिकॉर्ड किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाइट लेफ्टिनेंट रिफत अशरफी ने वीडियो रिकॉर्ड किया था और तहसीफ ने इसे आगे फैलाया था। इस पर तहसीफ ने पूछा था कि उनके खिलाफ क्या सबूत हैं। उन्होंने कहा था, 'भले ही मैंने वीडियो रिकॉर्ड किया हो या उसे फैलाया हो, उनके पास इसका क्या सबूत है?' उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें लगता है कि इन्हीं आरोपों की वजह से उन्हें वायुसेना से हटाया गया। हालांकि, उन्होंने इस बारे में पूरी जानकारी देने से इनकार किया था।

रॉ से संबंध बताए जाने पर क्यों भड़के थे तहसीफ?
पॉडकास्ट में तहसीफ ने बांग्लादेश वायुसेना में रॉ की कथित भूमिका से जुड़े आरोपों को भी खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि अगर उनका रॉ से कोई संबंध होता, तो वह बांग्लादेश में क्यों रहते और सार्वजनिक रूप से अपनी बात क्यों रखते? उन्होंने इन आरोपों को बेतुका बताया था। तहसीफ ने दावा किया था कि इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस निदेशालय ने भी कहा था कि उनका ऐसी किसी गतिविधि से संबंध नहीं है। हालांकि, इंटरव्यू में इस दावे के समर्थन में विस्तृत दस्तावेज नहीं दिखाए गए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि मीडिया रिपोर्ट के बाद उन्हें सामाजिक शर्मिंदगी और उत्पीड़न झेलना पड़ा। उनके मुताबिक, रिपोर्ट की हेडलाइन और उसे पेश करने के तरीके से लोगों के बीच उनकी गलत छवि बनी। उन्होंने बताया था कि उनका पासपोर्ट भी रोक लिया गया था, जिसे उन्होंने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा था कि इस वजह से उन्हें करीब दो साल तक परेशानी झेलनी पड़ी, हालांकि बाद में पासपोर्ट वापस मिल गया। उन्होंने वायुसेना से हटाए जाने के खिलाफ अपील भी नहीं की थी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता जताई थी।

सेना के जनसंपर्क निदेशालय ने क्या सफाई दी थी?
तहसीफ के इंटरव्यू के बाद सेना के जनसंपर्क निदेशालय ने चार अगस्त 2025 को दिए गए अपने बयान को दोहराया था। इसमें उन खबरों का खंडन किया गया था, जिनमें कहा गया था कि तहसीफ और फ्लाइट लेफ्टिनेंट रिफत अशरफी के खिलाफ कार्रवाई शेख हसीना के देश छोड़ने का वीडियो रिकॉर्ड करने और साझा करने के कारण हुई थी। तहसीफ ने 2024 की मीडिया रिपोर्ट को प्रचार बताते हुए खारिज किया था। हालांकि, उन्होंने वीडियो रिकॉर्ड करने या उसे फैलाने में अपनी कथित भूमिका की न तो पुष्टि की थी और न ही स्पष्ट खंडन किया था।

इस बीच, बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा था कि शुरुआती जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही वह टिप्पणी करेंगे। उनसे वीडियो रिकॉर्ड करने को लेकर सवाल किया गया, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। वहीं, हसीना के पूर्व सहयोगी अशरफुल आलम खोखन ने सवाल उठाया था कि क्या तहसीफ को जानबूझकर मीडिया में रॉ एजेंट बताया गया, ताकि उनकी हत्या कराई जा सके। उन्होंने उस समय तहसीफ की गतिविधियों को जुलाई में सत्ता संभालने वाले लोगों से जुड़ा बताया था। उनका इशारा मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार की ओर था। फिलहाल तहसीफ की मौत, दीप के बदले बयान और पुराने आरोपों के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
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