बांग्लादेश में हिंदू आबादी लगभग 8% है, लेकिन 13वें संसदीय चुनाव में केवल तीन हिंदू उम्मीदवार जीत सके। देखा जाए तो यह आंकड़ा पिछले 20 साल में अल्पसंख्यकों के सबसे कम प्रतिनिधित्व को दर्शाता है। ये नतीजे देश में अल्पसंख्यक भागीदारी पर सवाल तो खड़े कर ही रहे हैं। साथ ही देश की बदलती राजनीतिक तस्वीर को उजागर भी करते हैं।
बांग्लादेश में 18 महीनों के राजनीतिक संघर्ष और घमासान के बाद हुए 13वें संसदीय चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं। इस चुनाव में मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने जोरदार जीत दर्ज की है। पार्टी ने 299 में से 211 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की राह बनाई है और इसके नेतृत्व में तारिक रहमान हैं। यह जीत बीएनपी के लिए दो दशक में सबसे बड़ी वापसी का प्रतीक मानी जा रही है। हालांकि, इन नतीजों के बीच सबसे ध्यान खींचने वाली बात है अल्पसंख्यकों का सीमित प्रतिनिधित्व रहा।
79 अल्पसंख्यक उम्मीदवार में केवल चार जीते
चुनाव में कुल 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें बीएनपी के चार विजयी हुए। इसके अलावा, जमात-ए-इस्लामी का हिंदू उम्मीदवार हार गया। यह परिणाम न केवल अल्पसंख्यकों की राजनीतिक भागीदारी पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि देश की बदलती राजनीतिक तस्वीर को भी उजागर करते हैं। इतना ही नहीं विशेषज्ञों का तो यह भी मानना है कि इस जीत और हार का संकेत यह देता है कि बांग्लादेश की राजनीति में अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा और प्रतिनिधित्व अभी भी चुनौतीपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
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जमात का बेकार हुआ दाव, समझिए कैसे?
इसके उलट बांग्लादेश चुनाव में जमात-ए-इस्लामी का एकमात्र हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने खुलना-1 सीट से चुनाव लड़ा और 70,346 वोट प्राप्त किए, लेकिन बीएनपी के उम्मीदवार से पीछे रह गए। इसका मतलब है कि इस चुनाव में जमात द्वारा नामांकित कोई भी अल्पसंख्यक उम्मीदवार सफल नहीं हुआ।
अल्पसंख्यक उम्मीदवारों का आंकड़ा
गौरतलब है कि इस चुनाव में लगभग 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें राजनीतिक दलों के उम्मीदवार और स्वतंत्र उम्मीदवार दोनों शामिल थे। इनमें 10 महिलाएं भी थीं। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, संसद में सीटों की कुल संख्या के मुकाबले अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व अभी भी सीमित है। कुल 60 पंजीकृत राजनीतिक दलों में से 22 ने अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा, जिनमें लगभग 68 उम्मीदवार थे।