युनुस की अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की स्थिति पर कई विरोधाभासी रिपोर्ट्स और चिंताएं सामने आई हैं।
- न्यूयॉर्क स्थित थिंक टैंक गैटस्टोन इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सक्रिय रूप से उन कट्टरपंथी समूहों को सक्षम बनाया है जो अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इस्लामी कट्टरपंथियों, जिहादियों और आतंकवादियों को देश में कमजोर शासन का फायदा उठाने की मूक इजाजत दी है। इसके चलते धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं और धर्मनिरपेक्ष आवाजों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है। यूनुस के अंतरिम शासन में ऐसे हजारों कैदियों को रिहा किया गया है, जिन पर कट्टरपंथ से जुड़े मामलों और अल्पसंख्यक विरोधी हिंसा के केस दर्ज थे। इनमें जमात-ए-इस्लामी और उसके छात्र संगठन के कई नेताओं की रिहाई शामिल है।
दिसंबर 2025
18 दिसंबर को मयमनसिंह जिले के भालुका क्षेत्र में एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या किए जाने की घटना सामने आई। युवक पर कथित तौर पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद उसे पीटा गया और उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना की देश-विदेश में कड़ी निंदा हुई और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे।
20 दिसंबर को चटगांव जिले के राउजान उपजिला में हिंदू समुदाय के कम से कम नौ घरों को निशाना बनाकर आगजनी की गई। इस हमले में कई परिवार बेघर हो गए और उन्हें स्थानीय स्तर पर अस्थायी राहत की जरूरत पड़ी।
दिसंबर के अंतिम सप्ताह में राजबाड़ी जिले में एक हिंदू युवक 29 वर्षीय अमृत मंडल को भीड़ ने चोरी के आरोप में जान से मार दिया।
दिसंबर के अंत में इन घटनाओं के विरोध में भारत सहित कई देशों में प्रदर्शन हुए। भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।