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बांग्लादेश: अवामी लीग के नेता महबूबुल आलम हनीफ को मौत की सजा, जुलाई विद्रोह के दौरान छह लोगों की हत्या का आरोप

Thu, 29 Oct 2026 06:39 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

बांग्लादेश के विशेष न्यायाधिकरण ने अवामी लीग के संयुक्त महासचिव महबूबुल आलम हनीफ को जुलाई 2024 के विद्रोह के दौरान छह लोगों की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई है। तीन अन्य नेताओं को भी उम्रकैद दी गई है। सभी आरोपी अनुपस्थिति में दोषी ठहराए गए। शेख हसीना की पार्टी ने न्यायाधिकरण पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में क्या इन मुकदमों की निष्पक्षता को लेकर विवाद आगे भी जारी रहेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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शेख हसीना - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। इसी कड़ी में एक विशेष न्यायाधिकरण ने बृहस्पतिवार को पार्टी के संयुक्त महासचिव महबूबुल आलम हनीफ को मौत की सजा सुनाई। उन्हें 2024 के जुलाई विद्रोह के दौरान छह लोगों की हत्या का दोषी ठहराया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद उनकी पार्टी के कई नेताओं को अलग-अलग मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है। इस मामले में हनीफ समेत चारों आरोपी अदालत में मौजूद नहीं थे।

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महबूबुल आलम हनीफ को किस मामले में मौत की सजा सुनाई गई?
विशेष न्यायाधिकरण ने हनीफ को पश्चिमी बांग्लादेश के कुश्तिया जिले में छह लोगों की हत्या के मामले में दोषी पाया। न्यायमूर्ति नजरुल इस्लाम चौधरी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने फैसला सुनाया। इस पीठ में न्यायमूर्ति एमडी मंजूरुल बशिद और न्यायमूर्ति नूर मोहम्मद शहरियार कबीर भी शामिल थे। पीठ ने हनीफ को फांसी की सजा सुनाते हुए कहा कि उन्हें मौत होने तक फांसी पर लटकाया जाएगा। यह मामला जुलाई 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक प्रदर्शनों से जुड़ा है। इन प्रदर्शनों को जुलाई विद्रोह कहा जाता है। इसी आंदोलन के बाद पांच अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार गिर गई थी और वह भारत चली गई थीं।

अवामी लीग के तीन अन्य नेताओं को क्या सजा मिली?
न्यायाधिकरण ने इसी मामले में कुश्तिया जिले के अवामी लीग के तीन अन्य नेताओं को भी दोषी ठहराया। इन तीनों को मौत की सजा के बजाय जीवनभर जेल में रखने का आदेश दिया गया। अदालत ने चारों दोषियों की आधी संपत्ति जब्त करने का भी निर्देश दिया। फैसले के समय महबूबुल आलम हनीफ समेत चारों आरोपी फरार थे। ऐसे में सभी पर उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया। न्यायाधिकरण ने उन्हें जुलाई विद्रोह के दौरान प्रदर्शनकारियों को दबाने की कार्रवाई में भूमिका निभाने के आरोपों पर दोषी ठहराया। इस मामले में चारों आरोपियों का पक्ष सरकारी वकीलों ने रखा था।
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शेख हसीना की पार्टी के कितने नेताओं को मौत की सजा मिल चुकी है?
महबूबुल आलम हनीफ अवामी लीग के ऐसे 23वें नेता हैं, जिन्हें शेख हसीना की सत्ता से बेदखली के बाद मौत की सजा सुनाई गई है। इससे पहले 17 नवंबर 2025 को शेख हसीना को भी मौत की सजा सुनाई गई थी। उसी मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मृत्युदंड दिया गया था। पूर्व सरकार के कई अन्य नेताओं और अधिकारियों को उम्रकैद या दूसरी जेल की सजाएं सुनाई गई हैं। वहीं, कई अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं। कुछ मामलों में आरोपियों की मौजूदगी में और कुछ में उनकी अनुपस्थिति में सुनवाई हो रही है।

न्यायाधिकरण के फैसले पर क्या प्रतिक्रिया आई और निष्पक्षता पर क्या सवाल हैं?
न्यायाधिकरण के मुख्य अभियोजक एमडी अमीनुल इस्लाम ने फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इसे समय के अनुरूप बताते हुए कहा कि मानवता के खिलाफ अपराध के इस मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला दिया गया है। उन्होंने जुलाई विद्रोह में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि भी दी। दूसरी ओर, शेख हसीना और उनकी पार्टी के नेताओं ने न्यायाधिकरण को पक्षपातपूर्ण अदालत बताते हुए इसकी आलोचना की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और कई प्रमुख कानून विशेषज्ञों ने भी इन मुकदमों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। इस तरह फैसले के बाद न्यायिक प्रक्रिया को लेकर विवाद भी बना हुआ है।

शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में क्या बदला?
पांच अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनी, जिसका नेतृत्व मुहम्मद यूनुस ने संभाला। इसके बाद अवामी लीग के नेताओं और पूर्व सरकार के अधिकारियों के खिलाफ कई मामलों में कार्रवाई हुई। हनीफ को सुनाई गई सजा इसी क्रम का हिस्सा है। हालांकि, इस मामले में सभी चारों आरोपियों को उनकी अनुपस्थिति में दोषी ठहराया गया है और न्यायाधिकरण की निष्पक्षता पर सवाल भी उठे हैं। इसलिए यह फैसला केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद न्यायिक कार्रवाई और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर चल रही बहस से भी जुड़ा है।

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