विज्ञान लगातार तरक्की कर रहा है। इंसान ने विज्ञान की मदद से कई तरह के आविष्कार किए हैं मगर मौत के बाद फिर से किसी को जिंदा कर पाना असंभव ही लगता है। मगर अब एक ऑस्ट्रेलियाई कंपनी ने दावा किया है कि वो इंसान को मरने के बाद भी जिंदा कर देगी। इसके लिए कंपनी शव को बर्फ में दफनाने का काम कर रही है। एक क्रायोनिक्स कंपनी ने अपने पहले ग्राहक को बर्फ में दफना दिया है। कंपनी को उम्मीद है कि वह भविष्य में उसे जिंदा कर सकेगी।
पहले यह किया था कंपनी ने दावा
एक रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया की कंपनी सदर्न क्रायोनिक्स (Southern cryonics) का हेडक्वार्टर सिडनी में है और उन्होंने वहां से करीब 500 किलोमीटर दूर होलब्रुक में अपनी हाइटेक फैसेलिटी सेटअप की है। कंपनी ने दावा किया कि वो इंसान की लाश को -200 डिग्री सेल्सियस तापमान में दफन करेगी और उसके बाद भविष्य में अगर कभी विज्ञान इतनी तरक्की कर गया कि इंसान को मरने के बाद भी जिंदा किया जा सके तब दफन की गई लाशों को निकाल कर उन्हें जिंदा किया जाएगा।
80 साल के ग्राहक का शव दफनाया
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी गोलार्ध की पहली क्रायोनिक्स सुविधा संचालित करने वाली सदर्न क्रायोनिक्स ने एलान किया है कि उसने अपनी होलब्रुक सुविधा में अपने पहले ग्राहक को क्रायोजेनिक रूप से फ्रीज कर दिया है। बता दें कि 80 वर्षीय ग्राहक की सिडनी में माइनस 200 डिग्री सेल्सियस पर फ्रीज किए जाने से पहले मृत्यु हो गई थी।
हमने ठीक से तैयारी नहीं की होती तो...
आउटलेट के अनुसार, सदर्न क्रायोनिक्स के सुविधा प्रबंधक फिलिप रोड्स ने बताया, 'यह बहुत तनावपूर्ण था। यही वह बात थी जिसने मुझे एक सप्ताह तक जगाए रखा क्योंकि अलग-अलग दिनों में कई अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है और ऐसी कई स्थितियां थीं जो गलत हो सकती थीं यदि हमने ठीक से तैयारी नहीं की होती।'
परिवार ने अचानक फोन किया
रोड्स ने कहा कि भले ही उनकी फर्म इस साल से ही शवों को स्वीकार करने के लिए तैयार है, लेकिन उनका पहला ग्राहक थोड़ा खास था। उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने अचानक फोन किया और हमारे पास तैयारी करने के लिए लगभग एक सप्ताह का समय था। उनकी टीम ने सभी क्रायोनिक्स उपकरणों का परीक्षण किया और टीम लगभग पूरी तरह से तैयार थी।
उन्होंने कहा, 'हम तैयार थे, लेकिन जब आप ऐसे किसी मामले पर काम कर रहे होते हैं तो यह थोड़ा अलग होता है।'
यह है मास्टर प्लान
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पहले मरीज' की 12 मई को सिडनी के एक अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। उसे फिर से जिंदा करने की उम्मीद में उसके शरीर को संरक्षित करने की 10 घंटे की प्रक्रिया तुरंत शुरू हुई। उस व्यक्ति के शरीर को अस्पताल के ठंडे कमरे में ले जाया गया और उसे लगभग छह डिग्री सेल्सियस तक लाने के लिए बर्फ से ढका गया। फिर डॉक्टरों ने कोशिकाओं को संरक्षित करने और शरीर के तापमान को कम करने में मदद की। शरीर में एक तरल पदार्थ पंप किया, जो एक प्रकार के एंटी-फ्रीज के रूप में कार्य करता है।
इसके बाद मरीज को एक खास तरह के स्लीपिंग बैग में लपेटा गया और सूखी बर्फ में पैक किया गया। उसके शरीर का तापमान माइनस 80 डिग्री सेल्सियस के आसपास लाया गया और अगले दिन उसे सदर्न क्रायोनिक्स के होलब्रुक सुविधा में भेज दिया गया, जहां उसे लिक्विड नाइट्रोजन की डिलीवरी आने तक सूखी बर्फ पर रखा गया। फिर उस व्यक्ति का तापमान और कम करके माइनस 200 डिग्री सेल्सियस कर दिया गया और फिर उसे एक खास टैंक में रखा गया जो वैक्यूम स्टोरेज पॉड के रूप में काम करता है।
पूरी प्रक्रिया में करीब दो लाख डॉलर का खर्च
आउटलेट ने बताया कि पूरी प्रक्रिया में क्लाइंट को 170,000 डॉलर का खर्च आया, साथ ही संरक्षण प्रक्रिया में मदद करने के लिए मेडिकल टीमों के लिए अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ा। कंपनी ने कहा कि 10 घंटे की यह प्रक्रिया व्यक्ति के पुनर्जीवित होने की संभावना को बढ़ाने के लिए डिजाइन की गई है।
होलब्रुक सुविधा में वर्तमान में एक डिवार (dewar) है, जिसमें चार शव रखे जा सकते हैं। होलब्रुक साइट में 40 शव रखे जा सकते हैं। इसे और अधिक बढ़ाने की भी संभावना है, जिसके बारे में कंपनी का मानना है कि जल्द ही इसकी आवश्यकता हो सकती है।