भारत-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती चीनी आक्रामकता को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया ने अपनी नौसेना की उपस्थिति को मध्य पूर्व से एशिया-प्रशांत में स्थानांतरित करने के निर्णय की घोषणा की है। इस क्षेत्र में लगातार चीनी जहाज गश्त लगाते देखे जा सकते हैं। वहीं, अब ऑस्ट्रेलियाई नौसेना की तैनाती से चीन की चिंता बढ़ने वाली है।
रक्षा मंत्री लिंडा रेनॉल्ड्स का हवाला देते हुए, एबीसी न्यूज ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया अब हर साल मध्य पूर्व में एक रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना जहाज नहीं भेजेगा। इसके अलावा, देश अमेरिका के नेतृत्व वाले नौसैनिक गठबंधन से भी हटेगा।
मंत्री रेनॉल्ड्स ने कहा ने कहा, इस साल अकेले नौसेना ने जंगलों में लगी आग और कोविड-19 संकट के दौरान देश की काफी मदद की। इसके अलावा, नौसेना ने पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र में पांच-जहाजों की तैनाती और हमारे क्षेत्रीय भागीदारों के साथ कई अत्यधिक सफल गतिविधियां भी की। उन्होंने कहा, इसके परिणाम स्वरूप, ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल मध्य पूर्व में अपनी नौसैनिक उपस्थिति को कम करेगा ताकि हमारे क्षेत्र में अधिक संसाधनों को तैनात किया जा सके।
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एबीसी न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा कि इस बदलाव को सरकार के हालिया डिफेंस स्ट्रैटेजिक अपडेट में हरी झंडी दिखाई गई, जिसने घोषणा की कि बिगड़ती रणनीतिक परिस्थितियों के मद्देनजर अब सेना को भारत-प्रशांत और ऑस्ट्रेलिया के तत्काल क्षेत्र पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा।
इससे पहले, भारत ने अमेरिका और जापान के साथ आगामी मालाबार अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया की भागीदारी की घोषणा की। 19 अक्तूबर को भारतीय रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, भारत समुद्री सुरक्षा डोमेन में ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है, इसलिए भारत मालाबार 2020 में ऑस्ट्रेलियाई नौसेना की भागीदारी चाहता है।
इसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मारिस पायने ने कहा, मालाबार जैसे उच्च सैन्य अभ्यास ऑस्ट्रेलिया की समुद्री क्षमताओं को बढ़ाने, हमारे करीबी सहयोगियों के साथ अंतर-निर्माण करने और एक खुले और समृद्ध भारत-प्रशांत का समर्थन करने के लिए हमारे सामूहिक संकल्प का प्रदर्शन करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस निर्णय को अमेरिका में भी बहुत सराहना मिली।