फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

China: क्या चीन पर भारी पड़ेगी इन दो देशों की रक्षा संधि? लगाया अरबों डॉलर का दांव, समझिए समझौते की पूरी कहानी

Mon, 06 Jul 2026 03:08 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न

सार

दो देशों ने पहली बार आपसी रक्षा संधि पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही उन दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए भी बड़ा समझौता किया। इस कदम को दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच अहम माना जा रहा है। आखिर इस रक्षा संधि में क्या खास है? कौन से ये दो देश जो चीन के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं? साथ ये समीकरण चीन पर क्या असर डालेंगे? आइए, विस्तार से जानते हैं....
विज्ञापन
मुश्किल में जिनपिंग। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर एक बार फिर नई रणनीतिक हलचल शुरू हो गई है। एक नए रक्षा समझौते और अरबों डॉलर के निवेश को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आने वाले समय में पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति पर पड़ सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह समझौता चीन पर भारी पड़ेगा? दरअसल, यह रक्षा संधि ऑस्ट्रेलिया और फिजी के बीच हुई है।
विज्ञापन


दरअसल, ऑस्ट्रेलिया और फिजी ने सोमवार को पहली बार आपसी रक्षा संधि पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने फिजी की राजधानी सुवा में 'ओशन ऑफ पीस अलायंस' और आर्थिक सहयोग से जुड़ी 'वुवाले यूनियन' संधि पर भी सहमति जताई। इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया अगले 10 वर्षों में फिजी में एक अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक का निवेश करेगा। इस कदम को दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच ऑस्ट्रेलिया की बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।

इस नई रक्षा संधि में क्या खास है?

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और फिजी के प्रधानमंत्री सितिवेनी राबुका ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह फिजी की पहली आपसी रक्षा संधि है। अल्बनीज़ ने कहा कि 'ओशन ऑफ पीस अलायंस' के तहत दोनों देश जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की रक्षा में सहयोग करेंगे। राबुका ने कहा कि यह समझौता सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एकीकरण और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध मजबूत करने पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे फिजी और चीन के रिश्तों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

चीन के बढ़ते प्रभाव से इस समझौते का क्या संबंध है?

दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया लगातार अपने सहयोगी देशों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है। वर्ष 2022 में चीन और सोलोमन द्वीप के बीच सुरक्षा समझौते के बाद इस क्षेत्र में चीन के संभावित नौसैनिक अड्डे को लेकर चिंता बढ़ी थी। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने क्षेत्रीय देशों के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग तेज कर दिया। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और वानुअतु के बीच भी सुरक्षा और आर्थिक समझौता हुआ था, जिसे चीन ने लेकर चिंता जताई थी।

आर्थिक सहयोग पर क्या सहमति बनी है?

रक्षा संधि के साथ-साथ दोनों देशों ने 'वुवाले यूनियन' आर्थिक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया अगले एक दशक में फिजी में एक अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक का निवेश करेगा। दोनों देशों का कहना है कि इस निवेश का उद्देश्य आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता बढ़ाना है। फिजी ने कहा कि यह समझौता क्षेत्र में शांति, विकास और आपसी विश्वास को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

प्रशांत क्षेत्र में आगे क्या रणनीति है?

ऑस्ट्रेलिया अब प्रशांत क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भी सुरक्षा सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री अल्बनीज़ मंगलवार को सोलोमन द्वीप जाएंगे, जहां सुरक्षा समझौते पर आगे की बातचीत होगी। इसके बाद वह ब्रिस्बेन में पापुआ न्यू गिनी और टोंगा के नेताओं की मेजबानी करेंगे। इसी सप्ताह ऑस्ट्रेलिया और पापुआ न्यू गिनी के बीच रक्षा संधि भी प्रभावी हो जाएगी। लगातार हो रहे इन समझौतों को दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन मजबूत करने की ऑस्ट्रेलिया की व्यापक नीति के रूप में देखा जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें