साल भर पहले अमेरिका ने ऑकुस (ऑस्ट्रेलिया- यूनाइटेड किंग्डम- यूनाइटेड स्टेट्स) सुरक्षा संधि का औचक एलान किया था। घोषणा की गई थी कि इस संधि के तहत अमेरिका और ब्रिटेन की मदद से ऑस्ट्रेलिया परमाणु क्षमता वाली पनडुब्बियों का निर्माण करेगा। इस करार के लिए ऑस्ट्रेलिया ने फ्रांस से पनडुब्बी निर्माण का करार तोड़ दिया था। इस कारण फ्रांस का इन तीनों देशों से रिश्ता तनावपूर्ण हो गया था। तब विश्लेषकों ने कहा था कि चीन का मुकाबला करने की प्राथमिकता के कारण ये तीनों देश करीब आए हैँ।
लेकिन साल भर बाद ऐसा नहीं लगता कि ऑकुस से जो उम्मीद जोड़ी गई थी, वह पूरी हुई है। बल्कि प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैनिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं। हाल ही में चीन ने रूस के साथ मिल कर इस क्षेत्र में एक बड़ा सैनिक अभ्यास किया।
छह महीने पहले ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने ऑकुस के तहत अमेरिका और ब्रिटेन में मौजूद पनडुब्बियों की तर्ज पर ऑस्ट्रेलियाई पनडुब्बी के निर्माण की घोषणा की थी। लेकिन बताया गया है कि ये पनडुब्बियां 2040 में जाकर तैयार हो पाएंगी। ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख थिंक टैंक लॉवी इंस्टीट्यूट से जुड़े विशेषज्ञ सैम रॉगवीन ने इस बारे में अखबार द गार्जियन से कहा- ‘कई अरब डॉलर की लागत से बनने वालीं ये पनडुब्बियां दूर भविष्य की बात हैं। इस बीच हमारी कॉलिन्स क्लास की पनडुब्बियां पुरानी पड़ रही हैं।’
विशेषज्ञों के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया में अब महसूस किया जा रहा है कि चीन का खतरा बढ़ रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलियाई सेना की क्षमता जरूरत से बहुत कम है। इसे देखते हुए देश में ऑकुस डील को लेकर संदेह गहराया है। पूछा जा रहा है कि जब तक ये पनडुब्बियां तैयार होंगी, क्या इनकी टेक्नोलॉजी पुरानी नहीं पड़ जाएगी? यह सवाल भी उठाया गया है कि जब ऑस्ट्रेलिया के पास अब तक परमाणु पनडुब्बी रखने का कोई अनुभव नहीं है, तो उसे इन पनडुब्बियों के निर्माण में इतनी रकम क्यों खर्च करनी चाहिए? रॉगवीन ने कहा- ‘मेरी राय में हमें इस संभावना को गंभीरता से लेना चाहिए कि ऑकुस पनडुब्बियां हमें कभी ना मिल पाएं।’
थिंक टैंक ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट में सीनियर एनालिस्ट मार्कस हेलयर ने बताया है कि परमाणु पनडुब्बी परियोजना के लिए लगभग 250 लोगों को नौकरी पर रखा गया है। लेकिन जो परिणाम हम हासिल करना चाहते हैं, उसके लिए यह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि ऑकुस के तहत अंडरवाटर वाहन, क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, उन्नत साइबर क्षमता, हाइपरसोनिक और काउंटर हाइपरसोनिक क्षमता, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता आदि के विकास की बात भी कही गई है। उन्होंने कहा- ‘लेकिन इनमें से कई कार्यक्रम तो पहले से ही चल रहे थे। फिर ऑकुस नया क्या देने वाला है?’
इसके अलावा ऑकुस की सियासत पर भी कई संदेह जताए गए हैं। रॉगवीन ने कहा कि अगर अमेरिका की प्राथमिकता में चीन का मुकाबला करने की बात आज जितनी ऊपर नहीं रह गई, तो बन रही पनडुब्बियां ऑस्ट्रेलिया की ‘अनाथ क्षमता’ बन कर रह जाएंगी। हेलयर ने चिंता जताई है कि ऑस्ट्रेलिया जहां ‘क्राइसिस मोड’ (संकट की स्थिति) में है, वहीं चीन की क्षमताएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं।