पाकिस्तान में इन दिनों सोशल मीडिया यूजर्स अपने प्लेटफॉर्म पर गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में हाल की घटनाओं की कवरेज के बाद देश में एक इंटरनेशनल मीडिया आउटलेट तक पहुंच को ब्लॉक कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया यूजर्स क्या दावा कर रहे हैं?
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय समाचार वेबसाइट पर लगाया गया प्रतिबंध पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान के कुछ वर्गों द्वारा पीओके में हो रहे घटनाक्रमों के कवरेज से असंतुष्टि के बाद लगाया गया था।
चार दिनों में कितने लोग की मौत हुई?
इस बीच, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अशांति लगातार बढ़ रही है। खबरों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में पिछले चार दिनों में 50 से अधिक लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है।
उमर नजीर कश्मीरी ने क्या आरोप लगाया?
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने हिंसक कार्रवाई की है और कहा है कि हाल के दिनों में हमारे 50 से अधिक लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं।
जेएएसी ने क्या कहा?
एक अन्य बयान में, जेएएसी ने कहा कि मुजफ्फरबाद क्षेत्र में देर रात तक विरोध प्रदर्शन जारी रहे, जिसमें प्रदर्शनकारी अपने मौलिक अधिकारों की सुरक्षा और स्थानीय अधिकारियों द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन की मांग करते हुए सड़कों पर बने रहे।
एचआरएफ ने बल प्रयोग की खबरों की निंदा की
इन घटनाक्रमों ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान भी आकर्षित किया है। अमेरिका स्थित मानवाधिकार फाउंडेशन (एचआरएफ) ने पीओके में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की खबरों की निंदा की और पाकिस्तानी अधिकारियों से कार्रवाई रोकने, संचार सेवाएं बहाल करने और किसी भी गैरकानूनी बल प्रयोग के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया वेबसाइटों पर लगाए गए कथित प्रतिबंधों के साथ-साथ अशांति के दौरान इंटरनेट की पहुंच और मीडिया कवरेज को लेकर चिंताओं ने राजनीतिक अस्थिरता के दौर में पारदर्शिता, प्रेस की स्वतंत्रता और स्वतंत्र सूचनाओं के प्रवाह के बारे में चर्चाओं को तेज कर दिया है।