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कोरोना रोकने के लिए एनजीओ की पहल, आश्रयहीन लोगों के लिए बनाए हैंडवॉश स्टेशन

Sun, 19 Apr 2020 01:32 PM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अटलांटा
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आश्रयहीन लोगों के लिए लगाए हैंडवॉश स्टेशन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के लिए कई लोग एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। इसका एक उदाहरण अटलांटा की एक एनजीओ की पहल है। इसके सदस्य युवा, गरीबों और बेसहारा लोगों को जगह-जगह साबुन, पानी और सैनिटाइजर से लैस वॉश बेसिन उपलब्ध करा रहे हैं। इससे अब ग्रेमी अवॉर्ड विनर हिप-हॉप आर्टिस्ट लेक्रे भी जुड़ गए हैं। मार्च में इसकी शुरुआत अमेरिका में बेसहारा और आश्रयहीन लोगों की मदद करने वाले एनजीओ ‘लव बियॉन्ड वॉल्स’ ने की थी।

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40 जगहों पर दी जा रही सुविधा
पिछले महीने जब टेरेंस लेस्टर को यह पता चला कि सार्वजनिक स्थानों पर निकलने पर पाबंदी लगाई गई है और ऐसे समय पर आश्रयहीन लोगों के संक्रमित होने का खतरा बढ़ गया है तो उन्हें इस पहल की शुरुआत करने का विचार आया। टेरेंस ‘लव बियॉन्ड वॉल्स’ एनजीओ के संस्थापक हैं और उन्होंने इस पहल को ‘लव सिंक इन’ का नाम दिया है। उन्होंने 40 स्थानों पर हैंडवॉश स्टेशन लगाए हैं ताकि ऐसे लोग हाथों को साफ रख सकें।

पैडल की मदद से सिंक तक पहुंचता है पानी
हर हैंडवॉश स्टेशन में पांच गैलन पानी रखा जाता है। इसमें एक फुट पैडल लगा हुआ है। इस पैडल की मदद से सिंक तक पानी पहुंचता है और हाथ धोते समय नल को नहीं छूना पड़ता। एक हैंडवॉश स्टेशन की लागत 7,800 रुपए है। इन्हें लोगों से मिले दान से खरीदा गया है। 
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कई शहरों में लगे हैं हैंडवॉश स्टेशन
लेस्टर का कहना है कि उन्हें लोगों की मदद करना अच्छा लगता है। यह उन्हें लोगों से जोड़ता है। उन्होंने बर्मिंघम, अल्बामा, लॉस एंजिलिस और न्यूयॉर्क सिटी में हैडवॉश स्टेशन लगाए हुए हैं। साबुन और पानी इंसान का अधिकार है। 2008 में इसके लिए संयुक्त राष्ट्र बाल कोष की स्थापना हुई थी।

हर हफ्ते एक हजार से ज्यादा लोगों को मिलता है फायदा
हैंडवॉश स्टेशन में मौजूद पानी और साबुन एक दिन के लिए काफी होता है। एनजीओ से जुड़े लोग रोजाना इसे सैनिटाइज करते हैं। इसके अलावा वह रोजोना इसमें पानी और साबुन भरते हैं। लेस्टर का कहना है कि इससे हर हफ्ते एक हजार से ज्यादा लोगों को फायदा मिलता है।

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