संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतानेनी हरीश ने यूएनएससी में वीटो शक्ति पर भारत की स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि जब तक वीटो की व्यवस्था बनी हुई है, इसे सभी स्थायी सदस्य देशों द्वारा समान रूप से उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि यह निष्पक्ष और न्यायपूर्ण हो।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतानेनी हरीश ने एक बयान के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में वीटो शक्ति के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब तक वीटो शक्ति मौजूद है, यह सभी स्थायी सदस्य देशों को समान रूप से मिलनी चाहिए।
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उन्होंने बताया कि पिछले आठ दशकों में सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों ने अपने राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए वीटो का उपयोग किया है। इस अवधि में लगभग 200 बार वीटो का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि आज, संशोधित यूएन सुरक्षा परिषद में वीटो के इस्तेमाल के लिए कई विकल्प हैं, और भारत अन्य देशों के साथ मिलकर इस पर काम करने को तैयार है।
वीटो पर अफ्रीकी देशों की स्थिति का समर्थन किया
उन्होंने भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत का मानना है कि जब तक वीटो की व्यवस्था बनी हुई है, इसे सभी स्थायी सदस्य देशों द्वारा समान रूप से उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि यह निष्पक्ष और न्यायपूर्ण हो। इसलिए हम वीटो पर अफ्रीकी देशों की आम स्थिति का समर्थन करते हैं, जो चाहते हैं कि वीटो सभी के पास हो।
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वीटो का उपयोग सदस्य देशों की संप्रभु समानता के सिद्धांत के खिलाफ
पर्वतानेनी हरीश ने यह भी कहा कि वीटो का उपयोग सिर्फ पांच स्थायी सदस्य देशों के पास है, लेकिन यह संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की संप्रभु समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। इसलिए हम यह आग्रह करते हैं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के सभी पहलुओं, जिसमें वीटो भी शामिल है, को एक स्पष्ट समय सीमा के तहत और व्यापक तरीके से सुलझाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र के सुधारों के उद्देश्य को पूरा करने के लिए किसी भी प्रयास का समर्थन करेगा।