फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ बांग्लादेश में भड़के गुस्से का निशाना अल्पसंख्यक हिंदुओं को भी बनाया गया है। पैगंबर मोहम्मद के कार्टून बनाए जाने से खड़े हुए विवाद को लेकर बांग्लादेश के कट्टरपंथी इस्लामी संगठन आंदोलन पर उतरे हुए हैं। सोमवार को राजधानी ढाका में हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश संगठन की अपील पर हजारों की भीड़ सड़कों पर उतरी। इस संगठन के नेताओं ने बांग्लादेश सरकार से मांग की कि वह फ्रांस में बनी चीजों का बायकॉट करने का एलान करे।
इसके पहले रविवार को कमिला उप-जिले में मुरादनगर नाम की जगह पर हिंदुओं के दस से ज्यादा घरों पर हमले किए गए। इसके पहले हिंदू समुदाय के एक व्यक्ति ने अपने फेसबुक पेज पर फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का समर्थन किया था। शंकर देबनाथ नाम के इस व्यक्ति के घर को उपद्रवियों ने जला डाला। साथ ही हिंदुओं के दूसरे घरों पर भी हमले किए गए। मिनटों के भीतर इस हमले के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। खबरों के मुताबिक इससे पूरे देश में अल्पसंख्यक समुदाय में आतंक फैल गया है।
हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश की अपील पर सोमवार सुबह से ही हजारों की भीड़ ढाका में जुटने लगी। इन लोगों ने वहां बैतुल मुकर्रम मस्जिद से फ्रेंच दूतावास की तरफ मार्च शुरू किया। विश्लेषकों के मुताबिक फ्रांस से उठे इस विवाद को बांग्लादेश के कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों ने अपने लिए एक मौके के रूप में लिया है। इसके जरिए वे अपने को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वे प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद की सरकार को चुनौती दे सकें।
कट्टरपंथियों की बढ़ती गतिविधियों की मिसाल धर्म के नाम पर देश में हाल में हुई लिंचिंग की घटनाएं भी हैं। मसलन, पिछले 29 अक्टूबर को लालमोनिरहाट जिले में अबू मोहम्मद शाहिदुनाबी जेवेल नाम के एक 50 वर्षीय व्यक्ति को कुरान का अपमान करने के आरोप में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था।
इस बीच बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी- बेगम खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने फ्रांस के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों का अब खुला समर्थन कर दिया है। पार्टी ने कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी धर्म का अपमान करने को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि बीएनपी की राय में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून बनाना एक गंभीर अपराध है, जिसकी सबको निंदा करनी चाहिए। लेकिन फ्रांस के राष्ट्रपति ने इसका समर्थन किया, जिससे बांग्लादेश के करोड़ों लोग गुस्से में हैं।
कट्टरपंथी संगठनों से बीएनपी के संबंध जग-जाहिर हैं। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 2009 में सत्ता में आने के बाद से इन संगठनों पर लगाम लगाई है। उनके शासनकाल में बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में पाकिस्तान का साथ देने वाले कई कट्टरपंथी नेताओं पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें सजा दी गई। इससे कट्टरपंथी बचाव की मुद्रा अपनाने पर मजबूर हुए थे।
लेकिन इस बीच धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगर्स की हत्या और अल्पसंख्यकों पर हमले की घटनाएं होती रही हैं, जिनके पीछे कट्टरपंथी संगठनों का हाथ माना जाता रहा है। फ्रांस की घटनाओं से अब उन्हें खुलकर सामने आने का एक और मौका मिला है, जिसके जरिए वे देश में धार्मिक भावनाएं भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।