श्रीनगर स्थित संस्था 'एसोसिएशन ऑफ टेरर विक्टिम्स इन कश्मीर' (ATVK) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हो रही हिंसा की कड़ी निंदा की है। संस्था ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने और मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है। ATVK ने इन कार्रवाइयों को लोकतांत्रिक आजादी का हनन बताया है।
ATVK ने जताई चिंता
संस्था की अध्यक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा अख्तर ने एक ज्ञापन जारी किया है। इसमें उन्होंने हाल के प्रदर्शनों के दौरान आम नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हिंसक कार्रवाई करना बेहद शर्मनाक और अस्वीकार्य है। ATVK ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक संस्थाओं से इस स्थिति पर तुरंत ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि PoJK के हालात की निष्पक्ष जांच हो और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।
तस्लीमा अख्तर ने संयुक्त राष्ट्र से भी इस मामले में दखल देने को कहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत नागरिकों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए। इसी बीच, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी पाकिस्तान की इस कार्रवाई की आलोचना की है। एमनेस्टी ने 'जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JKJAAC) को आतंकवादी कानून के तहत प्रतिबंधित करने के फैसले को गलत बताया है। संस्था का कहना है कि पाकिस्तान असहमति की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग कर रहा है।
राजनीतिक कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने भी पाकिस्तान सरकार को घेरा
दूसरी तरफ, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के एक प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता और राजनीतिक विश्लेषक अमजद अयूब मिर्जा ने भी पाकिस्तान सरकार और सेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मिर्जा के अनुसार, PoJK में अशांति की मुख्य वजह विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें हैं। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए हैं जो पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं। इनका PoJK के राजनीतिक मामलों से कोई सीधा संबंध नहीं है। आरोप है कि पाकिस्तानी सेना इन सीटों का इस्तेमाल चुनाव के नतीजों को अपनी मर्जी से बदलने के लिए करती है।
अमजद अयूब ने लागाए गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारी इन 12 सीटों को खत्म करने की मांग कर रहे थे। लेकिन प्रशासन ने उनकी मांगें माने बिना ही 27 जुलाई को आम चुनाव कराने का एलान कर दिया। इसके विरोध में नौ जून को पूरे क्षेत्र में हड़ताल की गई। मिर्जा का दावा है कि सुरक्षा बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं। उन्होंने दावा किया कि इस हिंसा में बच्चों समेत 200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। सुरक्षा बलों पर घरों में छापेमारी करने, लोगों को मनमाने ढंग से गिरफ्तार करने और लूटपाट करने के भी आरोप लगे हैं।
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अमजद अयूब मिर्जा ने कहा कि पाकिस्तान PoJK को एक स्वशासी क्षेत्र के बजाय अपनी कॉलोनी की तरह समझता है। वहां अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदी है। सरकारी नौकरी पाने या चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों को PoJK पर पाकिस्तान के रुख का समर्थन करना अनिवार्य है। मिर्जा के अनुसार, पूरे PoJK में बड़े पैमाने पर बंद पाकिस्तान की नीतियों के खिलाफ जनता के बढ़ते गुस्से को दर्शाता है। उन्होंने दावा किया कि लोगों की सोच में भारी बदलाव आया है और आत्म-निर्णय तथा पाकिस्तानी राज्य के नियंत्रण का विरोध करने की मांगें बढ़ रही हैं।