चीन की सरकार अब आर्टिफ़ीशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर ख़ास ज़ोर दे रही है । इस क्षेत्र में अगले दशक तक वैश्विक अगुवा बनने की योजना के तहत पिछले हफ़्ते चीन ने एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है।
इंसान की ज़िंदगी में मशीनी इंक़लाब आने वाला है। इसके अनुसार, 2020 तक चीन एआई टेक्नोलॉजी में रफ़्तार पकड़ लेगा, 2025 तक वो बड़ी उपलब्धियां हासिल कर लेगा और 2030 तक दुनिया का बेताज़ बादशाह हो जाएगा। लंबे समय से एआई को रचनात्मकता और विकास के अग्रिम मोर्चे के रूप में देखा जाता रहा है क्योंकि इसका इस्तेमाल बहुत सारे क्षेत्रों में हो सकता है।
अर्थशास्त्री लगातार इस बात को कह रहे हैं कि चीनी अर्थव्यवस्था पर ठहराव का ख़तरा मंडरा रहा है और उसे जल्द ही इसमें जान फूंकने के लिए कुछ नए रचनात्मक तरीक़े अपनाने होंगे। चीनी प्रशासन भी मैन्यूफ़ैक्चरिंग आधारित मॉडल से हाईटेक आधारित मॉडल पर अर्थव्यवस्था को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रहा है। और इस रणनीति में एआई को अहमियत दी जा रही है।
चीन की कैबिनेट- स्टेट काउंसिल ने हाल ही में अपने बयान में कहा है कि एक शीर्ष रचनात्मक देश और आर्थिक शक्ति के रूप में चीन को स्थापित करने के लिए टेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण है। डाटा का विशाल खजाना है चीन के पास एआई पर ज़ोर देने के पीछे, इसके विशाल डाटा खजाने को भी इस्तेमाल करने की इच्छा शामिल है। देश के पास 73 करोड़ इंटरनेट यूज़र्स हैं और दुनिया में यहां सबसे ज़्यादा स्मार्ट फ़ोन यूज़र्स हैं।
इतना विशाल डाटा नेटवर्क, स्थानीय एआई डेवलपर्स को टेस्ट और टेक्नोलॉजी में सुधार का बेहतरीन मौका देता है। डाटाबेस के लगातार और बड़े होते जाने की वजह से ही चीन में बीते जून में ही नया साइबर सिक्योरिटी क़ानून लाया गया है।
इसके तहत कंपनियों के लिए, यूज़र्स के डाटा को चीन के अंदर मौजूद सर्वर पर ही डाटा डालने को अनिवार्य बनाया गया है। स्थानीय कंपनियों ने भी भविष्य में आने वाले मौके को भांपते हुए एआई में तेज़ी से निवेश करना शुरू कर दिया है।
चीन तीन बड़ी टेक कंपनियों- बाइदू, टेंसेंट और अलीबाबा ने एआई में भारी निवेश किया है। बाइदू के अध्यक्ष झांग याकिन के अनुसार, इस क्षेत्र में चीन जल्द ही अमरीका को पीछे छोड़ देगा। आईआईमीडिया रिसर्च के अनुसार, चीन के एआई उद्योग की 2016 में विकास दर 43।3 प्रतिशत थी और कुल व्यापार 1।47 अरब डॉलर के पार कर गया था। साल 2017 और 2019 में इसके 2।2 अरब डॉलर और 5।1 अरब डॉलर हो जाने की उम्मीद है।