संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने एआई के प्रभाव और जोखिमों का आकलन करने के लिए 40 सदस्यीय वैश्विक वैज्ञानिक पैनल के गठन को बहुमत से मंजूरी दी, जबकि अमेरिका ने इसका कड़ा विरोध एंतोनियो गुटेरस किया। इस पैनल का गठन करने वाले, यूएन महासचिव एंतोनियो - गुटेरस ने इसे एआई की वैश्विक वैज्ञानिक समझ की दिशा में एक बुनियादी कदम बताया।
एआई पैनल के पक्ष में, 193 सदस्यीय महासभा में 117 देशों ने मतदान किया, जबकि अमेरिका और पराग्वे ने विरोध में वोट डाला। ट्यूनीशिया और यूक्रेन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। वहीं, अमेरिका के कई सहयोगियों ने रूस, चीन और कई विकासशील देशों के साथ प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। पैनल का कार्यकाल-3 वर्ष का होगा। पैनल के अधिकांश सदस्य एआई विशेषज्ञ हैं। इसमें भारतवंशी विपिन कुमार और अमेरिकी मार्था पामर भी शामिल हैं।
अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन: अमेरिका
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन की काउंसलर लॉरेन लवलेस ने पैनल को संयुक्त राष्ट्र के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन बताया और कहा कि एआई शासन संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्देशित किए जाने का विषय नहीं है। उन्होंने कहा, एआई के - क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी के रूप में अमेरिका नवाचार को तेजी से बढ़ाने और अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। ट्रंप प्रशासन समान विचारधारा वाले देशों के साथ मिलकर साझा मूल्यों के अनुरूप एआई के विकास को प्रोत्साहित करेगा।