फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Artemis II: चांद से भी आगे ले जाएगा आर्टेमिस-2, अप्रैल में लॉन्चिंग; अंतिम तैयारियों में जुटा नासा

Wed, 21 Jan 2026 05:31 AM IST
लव गौर अमर उजाला नेटवर्क

सार

नासा इंसानों को पृथ्वी की कक्षा से बाहर ले जाने की अंतिम तैयारियों में जुटा है।आर्टेमिस-2 की अप्रैल में लॉन्चिंग होगी। हालांकि एजेंसी इसे फरवरी की शुरुआत में लॉन्च करने की दिशा में भी काम कर रही है।
 
विज्ञापन
सिम्युलेशन सत्रों में रिहर्सल करता अंतरिक्ष यात्री। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चांद पृथ्वी से 41,541 मील दूर है लेकिन नासा के आगामी मिशन आर्टेमिस-2 के लिए यह दूरी सिर्फ एक पड़ाव भर है। यह वही मिशन है, जो अपोलो कार्यक्रम के बाद पहली बार इंसानों को पृथ्वी की कक्षा से बाहर, चांद के चारों ओर और उससे भी आगे ले जाएगा। नासा इस ऐतिहासिक उड़ान की अंतिम तैयारियों में जुटा है। आधिकारिक तौर पर इसका लक्ष्य अप्रैल 2026 है, जबकि एजेंसी इसे फरवरी की शुरुआत में लॉन्च करने की दिशा में भी काम कर रही है।
विज्ञापन


नासा की आधिकारिक ताजा जानकारी और नेशनल जियोग्राफिक की रिपोर्ट के अनुसार आर्टेमिस-2 के कमांडर रीड विसमैन जब ओरियन यान के सिम्युलेटर में बैठते हैं, तो उनके सामने अंतरिक्ष की असली खामोशी नहीं, बल्कि तारों से भरा एक आभासी आकाश होता है। नीली शर्ट पर बड़े अक्षरों में लिखा है आर्टेमिस। चारों ओर कांच की डिजिटल डिस्प्ले, स्विच और संकेतक लाइट्स, जो यह बताती हैं कि मिशन के दौरान हर सेकंड क्या चल रहा होगा। ओरियन कैप्सूल के कमांड मॉड्यूल में कुल पांच खिड़कियां हैं, ठीक वैसे ही, जैसे अपोलो यानों में हुआ करती हैं।

इन सिम्युलेशन सत्रों में विसमैन और उनका दल उस हर परिस्थिति को समझने की कोशिश कर रहा है, जिसका सामना उन्हें असली उड़ान में करना पड़ सकता है। मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। कमांडर रीड विसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसन। मई 2023 में क्रू की घोषणा के बाद से यह टीम लगातार ट्रेनिंग में जुटी है। इन अंतरिक्ष यात्रियों ने स्पेससूट्स में काम करने का अभ्यास भी किया है, जो किसी आपात स्थिति में 144 घंटे तक उन्हें जीवित रख सकते हैं। इंजन फेल होने से लेकर कैप्सूल के भीतर शौचालय खराब होने जैसी स्थितियों तक, हर संभावित संकट पर सैकड़ों सिम्युलेशन किए जा चुके हैं।
विज्ञापन


 एक 30 घंटे के सिम्युलेशन के दौरान विक्टर ग्लोवर ने जानबूझकर कैप्सूल के भीतर ही सोने का फैसला किया। उनका मकसद था ओरियन के जीवन समर्थन तंत्र की उस धड़कन जैसी आवाज को महसूस करना, जो असली मिशन में लगातार सुनाई देगी।

ये भी पढ़ें: तकनीक: अब चांद की जानलेवा धूल नहीं बनेगी अंतरिक्ष यात्रियों के लिए समस्या, नासा ने विकसित की नई प्रणाली
विज्ञापन


कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरेगा यान
फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर के पैड 39-बी से उड़ान भरते ही एसएलएस का पहला चरण अलग होगा। ओरियन पहले पृथ्वी की दो कक्षाओं में घूमेगा, फिर मुख्य इंजन के जरिए चांद की ओर फ्री-रिटर्न पथ पर बढ़ेगा। करीब चार दिन में यान चांद तक पहुंचेगा, उसके चारों ओर फिगर-एट पथ में घूमेगा और फिर चार दिन में पृथ्वी की ओर लौटेगा। यह लगभग 10 दिन की उड़ान होगी, बिना किसी लूनर लैंडिंग के। चांद पर उतरने का लक्ष्य आर्टेमिस-3 के लिए रखा गया है, जो फिलहाल मध्य 2027 के लिए प्रस्तावित है।

अन्य वीडियो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें