सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने भूटान के राजा जिग्मे केस नामग्यालय वांगचुक और अन्य शीर्ष नागरिक और सैन्य नेताओं से मुलाकात की और स्थायी रणनीतिक संबंधों को और बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया।
डोकलाम पठार में भूटानी क्षेत्र के आसपास चीन के सैन्य ढांचे के विस्तार के प्रयास को लेकर भारत की बढ़ती चिंता की पृष्ठभूमि में जनरल पांडे भूटान की यात्रा पर हैं।
भूटान में जनरल पांडे की व्यस्तताओं से परिचित लोगों ने बताया कि उनकी वार्ता में क्षेत्रीय रक्षा और सुरक्षा चुनौती, पठार और आसपास के क्षेत्रों में चीनी गतिविधि और द्विपक्षी रक्षा सहयोग को और बढ़ाने के तरीके जैसे मुद्दे शामिल थे।
सेना प्रमुख की यह यात्रा भूटान की आवश्यकताओं के अनुसार पांच हजार मीट्रिक टन गेहूं और दस हजार मीट्रिक टन चीनी निर्यात को अधिकृत करने के भारत के फैसले के साथ हुई है। इस साल की शुरुआत में देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बारत ने दोनों वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।
सेना प्रमुख ने भूटान के राजा से की मुलाकात
सेना प्रमुख ने भूटान के चौथे राजा जिग्मे सिंगे वांगचुक से मिलने के अलावा शनिवार को राजा से मुलाकात की। सेना ने एक ट्वीट में कहा, जनरल मनोज पांडे ने भूटान के महामहिम जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच स्थायी द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने पर चर्चा हुई। सेना ने यह भी कहा कि थिम्पू में उन्हें 'त्रुटिहीन गार्ड ऑफ ऑनर' भी दिया गया।
जनरल पांडे ने अपने भूटानी समकक्ष लेफ्टिनेंट जनरल बट्टू सेरिंग के साथ डोकलाम ट्राई-जंक्शन की समग्र स्थिति सहित सभी प्रमुख मुद्दों पर व्यापक बातचीत की। जनरल पांडे ने भूटानी सेना के क्षमता निर्माण में लगे भारतीय अधिकारियों से भी मुलाकात की।
सैटेलाइट तस्वीरों में गांव का निर्माण करते दिखा चीन
जनरल पांडे की भूटान यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब कुछ दिनों पहले नई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आईं। इन तस्वीरों में चीन को भूटान की तरफ के डोकलाम पठार के पूर्व में एक गांव का निर्माण करते हुए दिखाया गया था, यह क्षेत्र भारत के रणनीतिक हित के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
तस्वीरें सामने आने के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत, राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित सभी घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहा है और अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक उपाय कर रहा है।
भूटान और चीन ने तीन चरणीय रोडमैप पर किए थे हस्ताक्षर
पिछले साल अक्टूबर में भूटान और चीन ने अपने बढ़ते सीमा विवाद को हल करने के लिए बातचीत में तेजी लाने के लिए 'तीन चरणीय रोडमैप' पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। भूटान, चीन के साथ चार सौ किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा साझा करता है और दोनों देशों ने विवाद को सुलझाने के लिए 24 दौर की सीमा वार्ता की है।
2017 में डोकलाम पठार में भारत-चीन के बीच गतिरोध ने दोनों परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसियों के बीच युद्ध की आशंका पैदा कर दी थी। भूटान का कहना है कि जिस क्षेत्र में चीन ने सड़क बनाने का प्रयास किया है, वह उसका है और भारत, भूटानके दावे का समर्थन करता है। भारत ने डोकलाम ट्राई-जंक्शन पर सड़क के निर्माण का भी कड़ा विरोध किया था क्योंकि इससे उसके समग्र सुरक्षा हितों पर असर पड़ता।