न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा ऑर्डर्न ने सोमवार को अपने नए मंत्रिमंडल के एलान से दुनिया को चौंका दिया। उन्होंने नानैया महुता को अपना विदेश मंत्री बनाया है, जो मूलवासी माओरी समुदाय की हैं। महुता ने अपनी ठोड़ी पर मोको काउए नामक पारंपरिक टैटू बनवा रखा है। यह माओरी समुदाय की खास पहचान है।
माओरी समुदाय के लोग ही उस द्वीप पर रहते थे, जिसे अपना उपनिवेश बनाने के बाद अंग्रेजों ने न्यूजीलैंड नाम दिया। धीरे-धीरे इस समुदाय को धकेल कर जंगलों में समेट दिया गया। उपेक्षा और अत्याचारों के कारण उनकी जनसंख्या भी बहुत घट गई। ये मांग लंबे समय से रही है, न्यूजीलैंड आकर बसे श्वेत लोग ऐसी ऐतिहासिक ज्यादतियों को स्वीकार करें और उसके लिए क्षमायाचना करें।
पिछले महीने न्यूजीलैंड में हुए आम चुनाव में जेसिंडा ऑर्डर्न के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने भारी जीत हासिल की। 1996 में नई चुनाव प्रणाली लागू होने के बाद ऐसा पहली बार हुआ, जब किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ हो। उसे 120 सदस्यों वाले सदन में 64 सीटें हासिल हुईं। नई संसद की एक खासियत यह भी है कि इस बार उसमें सामाजिक विभिन्नता को अभूतपूर्व प्रतिनिधित्व मिला है। इसमें लगभग आधी सदस्य महिलाएं हैं, जबकि दुनिया में महिलाओं की नुमाइंदगी का औसत तकरीबन 25 प्रतिशत ही है। नई संसद में लगभग 10 प्रतिशत सदस्य समलैंगिक या ट्रांसजेंडर हैं। न्यूजीलैंड के नए उप प्रधानमंत्री ग्रांट रॉबर्टसन भी गे यानी समलैंगिक हैं।
नई विदेश मंत्री नानैया महुता माओरी समुदाय से आने वाली पहली व्यक्ति थीं, जो सांसद बनी थीं। 1996 में आनुपातिक प्रतिनिधित्व और चुनाव क्षेत्र आधारित निर्वाचन की मिली-जुली प्रणाली अपनाए जाने के बाद ही ये संभव हो सका कि संख्यात्मक रूप से कमजोर हो चुके इस समुदाय को नुमाइंदगी मिली। विदेश मंत्री के रूप में अपनी नियुक्ति के बाद उन्होंने रेडियो न्यूजीलैंड पर कहा- ये मेरे लिए विशिष्ट गौरव की बात है कि मुझे विदेशी मंचों पर बातचीत करने का अवसर मिलेगा।
नई संसद में शरणार्थी के तौर पर न्यूजीलैंड आए समुदाय को भी प्रतिनिधित्व मिला है। गोलरिज गहरामैन ग्रीन पार्टी की तरफ से सदस्य चुने गए हैं। महुता को विदेश मंत्री बनाए जाने पर उन्होंने खास खुशी जताई। कहा कि न्यूजीलैंड ने विदेशी मामलों में अपनी आवाज को उपनिवेशवाद के असर से मुक्त करने की पहल की है। माओरी समुदाय में भी इस खबर से खुशी की लहर दौड़ी है।
माओरी टेलीविजन की राजनीतिक विश्लेषक रुकुवइ टिपने-एलन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब लोगों को देखने को मिलेगा कि एक माओरी जैसा बोलने और दिखने वाला व्यक्ति कैसा होता है। उन्होंने कहा- अब न्यूजीलैंड ने अपने लिए मूलवासी चेहरा अपनाया है। टिपने-एलन भी मोको काउए टैटू पहनती हैं। उन्होंने कहा कि ये निशान उनके समुदाय की पहचान है और ऐसी पहचान वाली व्यक्ति का विदेश मंत्री बनना इस समुदाय के हुए सशक्तीकरण की निशानी है।
मंत्रिमंडल की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री ऑर्डर्न ने कहा कि नया मंत्रिंडल गुणवत्ता पर आधारित है, साथ ही यह अविश्वसनीय रूप से बहुलताओं से भरा है। इस पर फख्र जताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जिस न्यूजीलैंड ने उसे चुना, उसकी प्रतिबिंब है। अपनी इस जैसी अनेक पहल के कारण ही ऑर्डर्न आज दुनिया भर में चर्चित हैं। अपनी समावेशी, उदार और न्यायप्रिय नीतियों के कारण एक बेहद छोटे देश की प्रधानमंत्री होने के बावजूद उन्होंने विश्व के प्रमुख नेताओं में अपनी जगह बना रखी है।