उत्तरी ध्रुव पर उच्च आर्कटिक का अध्ययन करने के लिए एक साल के लिए अंतररराष्ट्रीय वैज्ञानिकों को ले जाने वाला मिशन आइसब्रेकर लौट आया है। सबसे बड़े वैश्विक मिशन पर गए शोधकर्ता सोमवार को आर्कटिक महासागर से जुड़ी कई चौंकाने वाली जानकारियों का खजाना साथ लाए हैं।
ये आगामी दशकों में जलवायु परिवर्तन की सटीक भविष्यवाणी में मदद करेगा। सोमवार को आरवी पोलरस्टर्न उत्तरी बंदरगाह ब्रेहरहेवन पहुंचे, जहां से उन्होंने एक साल से ज्यादा समय कड़ाके की सर्दी और ध्रुवीय भालुओं में संघर्ष के अनुभव बताए। उन्होंने कहा कि हमने सब कुछ हासिल किया जो हमें चाहिए था।
अभियान के मुखिया, मार्क्स रेक्स ने बताया कि हमने बहुत ही अहम डाटा जुटाया है। वैज्ञानिक रैक्स ने कहा कि हम बर्फ के टुकड़े और पानी के अनगिनत नमूनों को साथ लाए हैं। बताया जा रहा है कि शोधकर्ताओं को ऐसे प्रमाण मिले हैं जिनसे साबित होता है कि सिर्फ कुछ दशकों के बाद आर्कटिक महासागर में गर्मियों में बर्फ देखने को नहीं मिलेगी। इस मिशन पर 17.7 डॉलर खर्च किए गए हैं।