अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से जारी तनाव और संघर्ष के बाद अब शांति की उम्मीदें मजबूत होती नजर आ रही हैं। दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ट्रूथ सोशल पर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की समझौते से जुड़ी पोस्ट को री-पोस्ट किया है।
अराघची ने दिया समझौते का संकेत
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि "इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन कभी इतना करीब नहीं रहा।" उन्होंने कहा कि समझौते को अंतिम रूप दिए जाने तक मीडिया को इसकी शर्तों को लेकर अटकलें लगाने से बचना चाहिए। अराघची ने यह भी कहा कि उनकी सरकार पारदर्शिता और जिम्मेदारी की नीति का पालन करती है और उचित समय पर समझौते की सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएंगी। ट्रंप द्वारा इस पोस्ट को साझा किए जाने के बाद माना जा रहा है कि दोनों पक्ष किसी बड़े समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।
'सिर्फ डील साइन करने पर नहीं मिलेगा पैसा'
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर हस्ताक्षर होते ही तेहरान को बड़ी आर्थिक राहत या नकद सहायता मिलेगी। वेंस ने इन खबरों को भ्रामक बताते हुए कहा कि केवल किसी समझौते पर हस्ताक्षर करने या वार्ता में शामिल होने के बदले ईरान को कोई धनराशि नहीं दी जाएगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में वेंस ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से बनी चिंताओं का समाधान निकालना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आर्थिक लाभ को ईरान द्वारा अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने से जोड़ा गया है। वेंस ने कहा कि प्रस्तावित समझौते को इस तरह तैयार किया गया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा प्राथमिकता बनी रहे। यदि ईरान समझौते की शर्तों का पालन करता है, तभी उसे आर्थिक लाभ मिल सकते हैं। उनका मानना है कि यह समझौता पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति और आर्थिक स्थिरता का रास्ता खोल सकता है।
तीन दिन की झड़पों के बाद बढ़ी शांति की उम्मीद
हाल के दिनों में अमेरिका, ईरान और इस्राइल के बीच सैन्य तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बार फिर बड़े युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया था। हालांकि अप्रैल से लागू संघर्षविराम के बाद बातचीत का दौर जारी रहा और अब समझौते की संभावनाएं मजबूत होती दिखाई दे रही हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने, संवेदनशील परमाणु सामग्री को नष्ट करने और आतंकवादी संगठनों को वित्तीय सहायता नहीं देने जैसी शर्तें शामिल हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने की संभावना
क्षेत्रीय अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता लागू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोला जा सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा ईरान पर लगे कुछ आर्थिक प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और विदेशों में जमे ईरानी संपत्तियों को वापस जारी करने पर भी सहमति बनने की खबर है।