अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने गुरुवार को यूक्रेन में युद्ध के लिए रूस की आलोचना की और कहा कि मास्को के साथ 'करीबी संबंध' बनाए रखने वाले देशों ने सार्वजनिक रूप से संघर्ष की निंदा की है। ब्लिंकेन ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि राष्ट्रपति पुतिन के आक्रमण को लेकर रूस के सहयोगियों के बीच सवाल और चिंताएं थीं। ब्लिंकेन ने यूक्रेन में रूसी हमले के बारे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एक सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। ब्लिंकेन ने कहा कि "यहां तक कि मॉस्को के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखने वाले कई देशों ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि राष्ट्रपति पुतिन के आक्रमण को लेकर उनके गंभीर प्रश्न और चिंताएं हैं।"
पीएम मोदी की टिप्पणी का अमेरिका ने किया स्वागत
ब्लिंकेन ने कहा कि पिछले हफ्ते भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पुतिन को की गई टिप्पणी का अमेरिका द्वारा स्वागत किया गया है। बता दें कि एससीओ शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि 'यह समय युद्ध का नहीं है'।
ब्लिंकेन के संबोधन से ठीक पहले, प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा कि भारत सहित अन्य देश रूस के खिलाफ बोल रहे हैं। अधिकारी ने कहा, "आप भारत समेत उन देशों के बढ़ते संकेत देख रहे हैं जिन्होंने अब तक इस मुद्दे पर बोलने से परहेज किया, अलग तरीके से बोल रहे हैं, जिसमें सीधे पुतिन के सामने की गई टिप्पणी शामिल है।"
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि पीएम मोदी की टिप्पणी "उनकी ओर से सिद्धांत का बयान है जिसे वह सही और न्यायसंगत मानते हैं"। उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी का अमेरिका द्वारा बहुत स्वागत किया गया है और भारतीय नेतृत्व, जिनका मास्को के साथ लंबे समय से संबंध हैं, ऐसी टिप्पणी करना इस संदेश को मजबूत करता है कि अब युद्ध समाप्त होने का समय आ गया है।"
तुर्की, चीन और भारत के नेताओं, जिनमें से सभी के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपेक्षाकृत सकारात्मक संबंध हैं, ने हाल ही में युद्ध पर सार्वजनिक रूप से अपनी दूरी बनाए रखी है, जिसे व्हाइट हाउस ने 'दिलचस्प' बताया है। अमेरिका के विदेश विभाग के पूर्व प्रवक्ता और व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में सामरिक संचार के समन्वयक जॉन किर्बी ने कहा कि मुझे लगता है कि उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन में चीन और भारत के नेताओं द्वारा जो कहा गया है, वह इस बात का संकेत है कि पुतिन यूक्रेन में जो कुछ भी कर रहे हैं, उसके लिए अब बहुत ज्यादा सहानुभूति नहीं है।