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जरूरी नहीं कि संक्रमण के बाद शरीर में एंटीबॉडी बनें

Sat, 01 Aug 2020 04:52 AM IST
अवधेश कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
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antibody Tests - फोटो : Pixabay
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कोरोना की चपेट में आने वाले लोग अगर ये सोच रहे हैं कि उनके भीतर एंटीबॉडीज बन गईं हैं और वो पूरी तरह सुरक्षित हैं तो ऐसा नहीं है। संक्रमण की चपेट में आए हर व्यक्ति में एंटीबॉडीज बने ये जरूरी नहीं है। ब्रिटेन में ऐसे मामले सामने आ चुकेहैं। 
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ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के वायरस एक्सपर्ट डॉ. साइमन क्लार्क का कहना है कि संक्रमण की चपेट में आने वाले कुछ लोगों की एंटीबॉडी जांच गई तो पता चला कि उनका शरीर वायरस के लिए इम्युन नहीं हुआ है क्योंकि संक्रमण के बाद उनमें एंटीबॉडीज नहीं बनी हैं। 

ऐसे में संक्रमण के बाद जिनमें एंटीबॉडीज नहीं बनी हैं उनमें दोबारा संक्रमण की संभावना हो सकती है। कई अध्ययनों से पता चला है कि दस में से एक कोरोना मरीज में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडीज नहीं बनती हैं।
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एंटीबॉडीज बनने में लग सकते हैं 50 दिन

लंदन के फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट़्यूट के इम्युनोलॉजिस्ट डॉ. रुपर्ट बील का कहना है कि संक्रमित के ठीक होने के बाद एंटीबॉडीज बनने में कम से कम 50 दिन लग सकते हैं। इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के प्रोफेसर डॉ. डैनी ऑल्टमैन के मुताबिक, दस में से एक में ऐसी संभावना रहती हैं जिसमें एंटीबॉडीज न बने या उसका स्तर कम हो।

वायरल लोड पर एंटीबॉडीज की निर्भरता

वैज्ञानिकों का कहना है कि संक्रमण का स्तर क्या था? लक्षण किस तरह के थे और रोग की गंभीरता क्या थी इस आधार पर भी शरीर में एंटीबॉडीज बनती हैं। शरीर में वायरल लोड जितना अधिक होगा एंटीबॉडीज का स्तर उतना अधिक हो सकता है। हां ये जरूर है कि एंटीबॉडीज ही सबकुछ नहीं होती है जिससे इम्युनिटी तय होती है। दूसरी कोशिकाओं का सक्रिय होना भी जरूरी है जिसे मेमोरी सेल्स कहते हैं।
 
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