वैज्ञानिकों का कहना है कि बुजुर्ग कोरोनो मरीजों को उनकी 'युवा' रोग प्रतिरोधक प्रणाली को बहाल करने और कोरोनो वायरस से लड़ने में मदद करने के लिए एंटी-एजिंग दवाएं (बुढ़ापे विरोधी दवाएं) दी जा सकती हैं।
अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों में 80 प्रतिशत 65 वर्ष से अधिक उम्र के हैं जिनमें 23 गुना अधिक मौत का खतरा है। एक व्यक्ति की उम्र बढ़ने के साथ ही उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है जिसकी वजह से वायरस को पहचानने और उसपर हमला करने में उनके शरीर को अधिक समय लगता है। इसकी वजह से वायरस को गंभीर बीमारी में बदलने में काफी समय मिल जाता है और वो अधिक घातक हो जाती है।
लेकिन हार्वर्ड के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समस्या का समाधान एनएडी बूस्टर (एंटी-एजिंग सप्लीमेंट्स) के साथ कुछ हद तक किया जा सकता है।
कई तरह की शोध में यह पाया गया है कि कोरोना का सबसे ज्यादा असर उम्रदराज लोगों पर हुआ है और इससे लड़ने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली का मजबूत होना आवश्यक है, ऐसे में बुजुर्गों की प्रणाली को मजबूत कर कुछ हद तक कोरोना के प्रभाव को रोका जा सकता है।