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Bangladesh: बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या, 25 दिन में आठवीं हत्या की वारदात

Tue, 13 Jan 2026 04:20 AM IST
देवेश त्रिपाठी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

बांग्लादेश में हाल के वर्षों में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा और हत्याओं की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। देश की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी कम होने के बावजूद वे बार-बार हमलों, लूटपाट, अपहरण और लक्षित हत्याओं का शिकार हो रहे हैं।
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बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या - फोटो : ANI
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विस्तार
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बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या कर दी गई। फेंगुआ के दागनभुआ में समीर दास (28) को पीट-पीटकर मार डाला गया। आरोपी उसका ऑटो लूटकर फरार हो गए। पुलिस हत्यारों की तलाश कर रही है। पिछले 25 दिन में बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या का यह आठवीं वारदात है।

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पुलिस के मुताबिक, समीर दागनभुआ के मातुभुइया संघ के रामानंदपुर गांव का रहने वाला था और लंबे समय से बैटरी ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। परिजनों ने बताया कि रविवार रात जब समीर समय पर घर नहीं लौटा, तो परिवार वालों ने उसकी तलाश शुरू की। बाद में पुलिस को सूचित किया गया। रात करीब दो बजे लोगों ने दक्षिण करीमपुर मुहुरी बाड़ी के पास समीर का लहूलुहान शव देखा।

साजिश के तहत की वारदात
पुलिस ने बताया कि हत्या को साजिशन अंजाम दिया गया। थाना प्रभारी फैयाजुल अजीम नोमान ने बताया, परिजनों की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की पहचान की कोशिश की जा रही है।
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11 जनवरी की शाम को हुई हत्या
पुलिस और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक दागनभुआ इलाके में समीर कुमार दास की हत्या की घटना 11 जनवरी की शाम की है। समीर कुमार दास, कार्तिक कुमार दास और रीना रानी दास के सबसे बड़े बेटे थे। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए फेनी जनरल अस्पताल भेजा।

हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ रहे हिंसा के मामले
पुलिस का कहना है कि ऑटोरिक्शा गायब होने से लूटपाट के इरादे से हत्या की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अन्य कारणों से भी इनकार नहीं किया गया है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा, धमकी और असुरक्षा की घटनाएं लगातार रिपोर्ट हो रही हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि कमजोर कार्रवाई और देरी से न्याय न मिलने के कारण अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल बना हुआ है।
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