श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पहुंचे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और आयरलैंड के प्रधानमंत्री मार्टिन।
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केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि कनाडा एक मूल्यवान साझेदार और भारत का मित्र है। हम जीवंत सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध साझा करते हैं। हम लोकतांत्रिक परंपराओं से बंधे हैं। उन आदर्शों के लिए हमें सभी प्रकार के उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करना होगा। जब अलगाववादी हिंसा और अलगाववादी आवाजों को पनाह मिलती है, जब चरमपंथी लोग हिंसा का महिमामंडन करते हैं और वे न केवल उन लोगों को धमकाते हैं जिनकी जान वे लेते हैं, बल्कि वे पूरे समाज को धमकाते हैं। साथ मिलकर काम करके, खुफिया जानकारी साझा करके, फंडिंग चैनल बंद करके और कट्टरपंथ का मुकाबला करके, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जो लोग नफरत और आतंक को बढ़ावा देना जारी रखते हैं, वे सफल न हो सकें।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत और भी बहुत कुछ करने के लिए तैयार है। हमारी सुरक्षा एजेंसियां, खुफिया तंत्र और कूटनीतिक चैनल कनाडा और अन्य सभी देशों के साथ साझेदारी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आइए हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयासों को दोगुना करें कि 23 जून 1985 को जो हुआ वह कभी दोहराया न जाए। न यहां, न भारत में, न ही दुनिया में कहीं भी।
उन्होंने कहा कि दुनिया को न केवल इस तरह के गंभीर शोक की घटनाओं में एक साथ आने की जरूरत है, बल्कि इस आतंकवाद से निपटने के लिए सामूहिक, सक्रिय प्रयासों की भी जरूरत है। विचारधाराएं अलग-अलग हो सकती हैं, राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हमें सतर्क रहने की जरूरत है। हमें इन खतरनाक प्रवृत्तियों को पहचानने की जरूरत है, जो गायब होने के बजाय और अधिक मजबूत होती जा रही हैं।
आयरिश प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन ने कहा कि उस सुबह आयरलैंड के आसमान में 329 निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवा दी और समय बीतने के साथ इस क्षति और इस अत्याचार का महत्व कम नहीं हुआ है। जबकि इस भयावह कृत्य का महत्व वैश्विक है। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि यह एक अत्यंत व्यक्तिगत त्रासदी है।
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आयरलैंड में कनिष्क हादसे के मृतकों की याद में बना स्मारक।
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कनिष्क बम विस्फोट मामला क्या था?
23 जून 1985 को एअर इंडिया की फ्लाइट 182 ने मॉन्ट्रियल से लंदन के लिए उड़ान भरी। इसे नई दिल्ली जाना था। एअर इंडिया का यह विमान एक बोइंग 747 जंबो जेट था। जिसे सम्राट कनिष्क के नाम पर कनिष्क नाम दिया गया था। वैंकूवर में एक सूटकेस कार्गो में चेक इन किया गया। इस सूटकेस में बम रखा हुआ था।
विमान आयरिश हवाई क्षेत्र में था। तभी एक जोरदार धमाका हुआ। जमीन से 31 हजार फीट की ऊंचाई पर हुए इस धमाके में विमान सवार 22 क्रू मेंबर और सभी 307 यात्री मारे गए। इनमें 268 कनाडाई, 27 ब्रिटिश और 24 भारतीय नागरिक मारे गए। कनाडाई नगारिकों में कई भारतीय मूल के लोग भी थे।
धमाके के मारे गए लोगों में से केवल 132 शव ही बरामद किए जा सके थे। बाकी 197 शवों का पता तक नहीं चल पाया। धमाके में मारे गए लोगों में नदिया के पार फिल्म में एक्टर सचिन के बड़े भाई की भूमिका निभाने वाले इंद्र ठाकुर भी शामिल थे। इंद्र के साथ उनकी पत्नी प्रिया और उनके बेटे की भी जान इस आतंकी हमले में चली गई थी। धमाके के वक्त विमान हीथ्रो एयरपोर्ट से महज 45 मिनट की दूरी पर था। धमाके के बाद विमान टुकड़े-टुकड़े हो गया। विमान के टुकड़े अटलांटिक महासागर में जा गिरे।
कनाडा और भारतीय जांच में पता चला कि इस बम धमाके की योजना बनाने का काम और उसका क्रियान्वयन कनाडा में रहने वाले सिख अलगावादियों ने किया था। ये अलगावादी पंजाब में सक्रिय उग्रवादियों के निर्देश पर काम कर रहे थे। जांचकर्ताओं ने बताया कि बम धमाकों को आतंकवादी समूह बब्बर खालसा ने ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेने के लिए अंजाम दिया था।