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West Asia Crisis: अमेरिका के लिए शांति वार्ता से हटना क्यों नहीं आसान? विशेषज्ञ कुगेलमैन ने बताई असल वजह

Sun, 12 Apr 2026 10:50 AM IST
Devesh Tripathi वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष को खत्म करने के लिए इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही है। इसे एक बड़ी राजनयिक विफलता माना जा रहा है। हालांकि, अमेरिकी विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि अमेरिका के लिए बातचीत की मेज से दूर जाना मुश्किल है।
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विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन - फोटो : ANI
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विस्तार
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अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बिना किसी समझौते के पाकिस्तान से रवाना होने को एक बड़ी राजनयिक विफलता के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, विल्सन सेंटर के दक्षिण एशिया संस्थान के निदेशक माइकल कुगेलमैन का मानना है कि इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता एक लंबी प्रक्रिया का केवल एक विराम है।
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कुगेलमैन ने एक्स पर एक पोस्ट में तर्क दिया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की वरिष्ठता और व्हाइट हाउस पर पड़ने वाले घरेलू दबावों से संकेत मिलता है कि अमेरिका के बातचीत की मेज से दूर हटने की संभावना कम है। 

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अभी खत्म नहीं हुई बातचीत की संभावना : विशेषज्ञ कुगेलमैन
विशेषज्ञ कुगेलमैन ने कहा, "घरेलू राजनीतिक कारणों से अमेरिका एक ऐसे समझौते की तलाश में है, जो उसे युद्ध से बाहर निकलने में सक्षम बनाए। इतने वरिष्ठ समूह का पाकिस्तान तक उड़ान भरना अमेरिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वेंस की टिप्पणियों के बावजूद यह संभवतः खत्म नहीं हुआ है। अभी और बातचीत हो सकती है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह पाकिस्तान में होंगी या कहीं और।"

क्षेत्रीय संघर्ष से बाहर निकलने की रणनीति
अमेरिकी मतदाता विदेशी उलझनों से तेजी से थक रहे हैं और 2026 के आर्थिक संकट ने संसाधनों पर दबाव डाला है। ऐसे में प्रशासन पर क्षेत्रीय संघर्ष से निकलने की रणनीति बनाने का भारी दबाव है। 1979 के बाद से अमेरिका-ईरान के सबसे महत्वपूर्ण जुड़ाव की मेजबानी करके इस्लामाबाद ने वॉशिंगटन के लिए अपनी उपयोगिता साबित की है, खासकर ऐसे समय में जब प्रशासन विश्वसनीय मध्यस्थों की तलाश में है।

भविष्य की संभावित राहें
विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन के विश्लेषण से तीन संभावित रास्ते सुझाए गए हैं:
  • जनता की नजरों से दूर निम्न-स्तरीय तकनीकी चर्चाओं को जारी रखी जाए, ताकि लेबनान के मामले का हल निकाला जा सके और कमियों का लाभ उठाया जा सके।
  • भविष्य में उच्च-स्तरीय शिखर सम्मेलन, संभवतः एक तटस्थ यूरोपीय शहर या मस्कट या दोहा जैसे पश्चिम एशियाई केंद्र में स्थानांतरित हो सकते हैं।
  • अगले औपचारिक दौर की शुरुआत से पहले ईरान को रियायतें देने के लिए मजबूर करने के लिए अमेरिका द्वारा अधिकतम दबाव वाली बयानबाजी का दौर चले।

शांति वार्ता से क्यों पीछे नहीं हटेगा अमेरिका? 
हालांकि इस्लामाबाद में हुई लंबी बातचीत अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंची। कुगेलमैन ने कहा कि अमेरिका इस राजनयिक दुस्साहस में इतना डूब चुका है कि वह अब पीछे नहीं हट सकता। इस गतिरोध के मुख्य कारणों में होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान की परमाणु क्षमताएं शामिल थीं।

वार्ता की स्थिति और मुख्य मुद्दे
इस्लामाबाद में संवाददाताओं से बात करते हुए वेंस ने कहा, "हमने ईरानियों के साथ कई ठोस समझौते किए हैं - यह अच्छी खबर है। बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंचे हैं। यह अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है।" विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संवाद जारी रहने की संभावना है। यह क्षेत्र में तनाव को कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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फार्स समाचार एजेंसी ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के करीबी सूत्र के हवाले से बताया कि अमेरिका ने संघर्ष के दौरान जो कुछ भी हासिल नहीं कर सका, वह सब कुछ मांगा। एजेंसी ने बताया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु कार्यक्रम पर रोक और कई अन्य मुद्दों पर अमेरिका की शर्तों को स्वीकार नहीं किया।

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