Chinese Foreign Minister Wang Yi and Russian Foreign Minister Sergey Lavrov
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के अचानक यूक्रेन की यात्रा करने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का ध्यान चीन के विदेश नीति के प्रभारी वांग यी की रूस यात्रा पर टिक गया है। वांग अपनी आठ दिन की यूरोप यात्रा के आखिरी मुकाम के तौर पर इसी हफ्ते मास्को पहुंचेंगे। क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय) ने वांग की रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के साथ संभावित मुलाकात की संभावना से इनकार नहीं किया है। अमेरिकी मीडिया में छपी टिप्पणियों के मुताबिक वांग की इस रूस यात्रा पर अमेरिका की खास नजर रहेगी।
विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि अमेरिका और चीन के रिश्तों में लगातार बढ़ते तनाव के बीच रूस और चीन के संबंध मजबूत होते गए हैं। इसे लेकर अमेरिकी अधिकारियों के कान खड़े हुए हैं। जर्मनी में हुए म्युनिख सिक्युरिटी कांफ्रेंस के दौरान जब अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन वांग यी से मिले, तो उन्होंने चेतावनी दी कि चीन रूस को हथियार ना दे। हालांकि रूस को हथियार देने की बात का चीन लगातार खंडन करता रहा है, लेकिन हाल में इस बारे में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का शक गहरा गया है।
म्युनिख सम्मेलन को संबोधित करते हुए वांग ने अमेरिका की परोक्ष आलोचना करते हुए कहा- ‘हम आग में घी नहीं डालते हैं। हम यूक्रेन संकट का लाभ उठाने के खिलाफ हैं।’ उधर चीन के सरकारी मीडिया ने आरोप लगाया है कि अमेरिका अपने भू-राजनीतिक स्वार्थों को साधने के लिए यूक्रेन युद्ध को लंबा खिंचने की रणनीति पर चल रहा है। युद्ध लंबा खिंचने का फायदा अमेरिका की हथियार बनाने वाली कंपनियों को मिल रहा है।
जबकि अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि रूस और चीन के बीच संबंध सैन्य संबंध बढ़ रहे हैं। उनके मुताबिक इसीलिए ब्लिंकेन ने यह मुद्दा वांग के सामने उठाया। जो बाइडन प्रशासन के अधिकारियों ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा है कि अगर यह बात साबित हो गई कि चीन रूस को हथियार दे रहा है, तो उससे दुनिया में तनाव काफी बढ़ जाएगा। उससे एक खतरनाक और अनिश्चित स्थिति बन जाएगी। सोमवार को बाइडेन की मौजूदगी में यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि अगर चीन ने रूस को हथियार दिए, तो उससे तीसरे विश्व युद्ध की स्थिति बन जाएगी।
चीन ने यूक्रेन पर रूस की सैनिक कार्रवाई की निंदा नहीं की है, लेकिन उसका दावा है कि रूस और यूक्रेन के बीच उसने तटस्थता बनाए रखी है। चीन इस युद्ध के लिए नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) को दोषी ठहराता रहा है। उधर यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद गुजरे एक साल में रूस और चीन के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध गहराए हैं। इस बीच दोनों देशों के साझा सैनिक अभ्यास में भी बढ़ोतरी हुई है।
इस बीच अमेरिकी अधिकारियों के चीन की तरफ से रूस को हथियार दिए जाने के आरोप ने नया तनाव पैदा कर दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को अमेरिका पर झूठी सूचनाएं फैलाने का आरोप लगाया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा- ‘युद्ध के मैदान में हथियार पहुंचाना चीन का नहीं, बल्कि अमेरिका का काम है। अमेरिका को इस बात कोई अधिकार नहीं है कि वह चीन को लेक्चर दे। चीन और रूस के रिश्तों में वह जोर-जबर्दस्ती करे, इसे हम कभी स्वीकार नहीं करेंगे।’