सिख ऑफ अमेरिका के अध्यक्ष कंवलजीत सिंह सोनी ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब एक पूजा स्थल है। गुरुद्वारों को राजनीतिक विचारों से मुक्त रहना चाहिए। न्यूयॉर्क सहित पूरे अमेरिका में सिख समुदाय बिना किसी दबाव या डर के गुरुद्वारे में आ सकें। इसलिए गुरुद्वारा प्रशासन को आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना चाहिए।
अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत संधू के साथ हुए दुर्व्यवहार पर अमेरिका की एक सिख संस्था ने आपत्ति जताई है। संस्था ने कहा कि गुरुद्वारा प्रशासन को आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहिए। बता दें, प्रकाश पर्व के अवसर पर संधू न्यूयॉर्क के हिक्सविले गुरुद्वारा गए थे। यहां उनके साथ कुछ खालिस्तानी समर्थकों ने बदसलूकी की थी।
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गुरुद्वारों को राजनीतिक विचारों से मुक्त रहना चाहिए
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामले में सिख ऑफ अमेरिका के संस्थापक जसदीप सिंह जस्सी और अध्यक्ष कंवलजीत सिंह सोनी ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब एक पूजा स्थल है। गुरुद्वारों को राजनीतिक विचारों से मुक्त रहना चाहिए। न्यूयॉर्क सहित पूरे अमेरिका में सिख समुदाय बिना किसी दबाव या डर के गुरुद्वारे में आ सकें। इसलिए गुरुद्वारा प्रशासन को आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना चाहिए। आरोपियों ने गुरुद्वारा साहिब का अनादर किया है। आरोपियों ने गुरुद्वारा साहिब की पवित्रता को भंग किया है। उन्होंने कहा कि हम लॉन्ग आइलैंड स्थित गुरुद्वारे में एक सिख भक्त और अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू के अपमान की कड़ी निंदा करते हैं।
कहासुनी का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल
खालिस्तानी समर्थकों के साथ तरणजीत संधू की कहासुनी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में संधू को खालिस्तानी समर्थकों के साथ भिड़ते हुए देखा जा सकता है। खालिस्तानी समर्थकों के एक समूह ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और हरदीप सिंह निज्जर के बारे में सवाल किए। खालिस्तानी समर्थकों में से एक व्यक्ति ने गुरुद्वारे के बाहर खालिस्तानी झंडा भी लहराया।
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खालिस्तान समर्थकों की हिंसा में लगातार बढ़ोत्तरी
गौरतलब है कि कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका समेत कई इलाकों में खालिस्तानी समर्थकों द्वारा की जानी वाली हिंसाओं की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इससे पहले खालिस्तानियों ने जुलाई में सैन फ्रांसिस्कों में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर आगजनी की थी। भारत ने मामले के संबंध में अमेरिकी अधिकारियों से सबूत देने का आग्रह किया है। इससे पूर्व सितंबर में ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी को स्कॉटलैंड के ग्लासगो में एक गुरुद्वारे में प्रवेश करने से रोक दिया गया था।