अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के सलाहकार और अमेरिकी विदेश विभाग के काउंसलर डेरेक चोलेट ने कहा कि यूक्रेन से युद्ध के बाद भारत का सबसे विश्वसनीय साझीदार रूस नहीं, बल्कि अमेरिका ही होगा। बाइडन प्रशासन के इस अधिकारी ने कहा कि अमेरिका भारत की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने को भी तैयार है।
रूस अपने ही सैन्य उपकरणों को बडे़ पैमाने पर ध्वस्त कर रहा
अमेरिकी विदेश विभाग के काउंसलर डेरेक चोलेट ने एक इंटरव्यू में कहा कि रूस अपने ही सैन्य उपकरणों को बडे़ पैमाने पर ध्वस्त करता जा रहा है, इसलिए उसे पहले अपनी ही सैन्य जरूरतों को पूरा करना होगा। रूस की क्षमताओं को देखते हुए वह भविष्य में विश्वसनीय साझीदार नहीं मालूम पड़ता है।
विदेश विभाग के उप मंत्री स्तर के अधिकारी चोलेट ने कहा कि बाइडन प्रशासन भारत के साथ काम करने के लिए बेहद उत्सुक है। भले ही भारत अपनी रक्षा क्षमताओं और रक्षा आपूर्तिकर्ताओं की विविधता को कायम रखे। अमेरिका भारत के इन प्रयासों में उसका साझीदार बनना चाहता है। हम इस प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहते हैं। रक्षा के नियम शर्तों को लेकर हम पूरी कोशिश कर रहे हैं, जितनी इतिहास में पहले कभी नहीं की है।
रूस के सैन्य उपकरण समय-समय पर नाकामी दिखा रहे
चोलेट ने दावा किया कि रूस की ओर से दिए गए सैन्य उपकरण समय-समय पर नाकामी दिखाते रहे हैं। आने वाले समय में रूस के साथ व्यापार करना और भी मुश्किल होता जाएगा। पिछले 12 हफ्तों में रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद उसके साथ कोई भी कारोबार करना पहले के मुकाबले और कठिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि रूस के खिलाफ मौजूदा निर्यात नियंत्रण और अहम तकनीकों के आयात को लेकर अक्षमता कुछ सैन्य उपकरणों के कलपुर्जों को हासिल नहीं करने देगी। इससे रूस के साथ कारोबार मुश्किल होता जाएगा। इसलिए रूस अब उतना आकर्षक साझीदार नहीं रहा।