तस्वीर की अमेरिकी आर्काइव्स में सबसे अधिक मांग क्यों
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आज आपको एक तस्वीर की कहानी सुनाते हैं। ये तस्वीर है दिसंबर 1970 की, जब उस वक्त के अमरीकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन, किंग ऑफ रॉक एंड रोल, एल्विस प्रेस्ले से मिले थे। ये मुलाकात व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति के दफ्तर ओवल ऑफिस में हुई थी। इस मुलाकात की तस्वीर की आज अमरीका के नेशनल आर्काइव्स में सबसे ज्यादा मांग है। लोग, चांद पर इंसान के उतरने की तस्वीर से ज़्यादा इस मुलाकात की तस्वीर मांगते हैं। उन्हें अमरीका के आज़ादी के एलान के दस्तावेज़ में भी इतनी दिलचस्पी नहीं। जितनी इस तस्वीर में है। दिलचस्प बात ये है कि इस मीटिंग की असलियत और कहानी में बड़ा फर्क है। इस मुलाकात पर अभी हॉलीवुड में एक फिल्म बनी है। जिसमें केविन स्पेसी ने रिचर्ड निक्सन और माइकल शैनन ने एल्विस प्रेस्ले के किरदार निभाए हैं। फिल्म का नाम है, 'द ट्रू स्टोरी यू वोंट क्वाइट बिलीव'। गायक और अभिनेता एल्विस प्रेस्ले कभी कुछ लिखते नहीं थे। मगर एक दिन वॉशिंगटन की एक उड़ान के दौरान उन्होंने फ्लाइट अटेंडेंट से कलम और कागज मांगकर, अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन को चिट्ठी लिखी। प्रेस्ले ने कहा कि अगर वो देश के किसी भी काम आ सकें तो उनके लिए गर्व की बात होगी। उन्होंने खुद को नाम का ही सही, खुफिया एजेंट बनाने की अपील की।
वॉशिंगटन पहुंचकर प्रेस्ले ने ये चिट्ठी ख़ुद जाकर व्हाइट हाउस के स्टाफ़ को दी। संयोग से ये चिट्ठी निक्सन के सलाहकार एगिल बड क्रो को मिली। क्रो ख़ुद एल्विस प्रेस्ले के बहुत बड़े फ़ैन थे। उन्होंने उसी दिन दोपहर साढ़े बारह बजे प्रेस्ले की राष्ट्रपति निक्सन से मुलाक़ात तय करा दी। दोपहर में एल्विस प्रेस्ले सूट बूट में सजकर राष्ट्रपति से मिलने पहुंचे। वो राष्ट्रपति निक्सन के लिए तोहफ़े में एक पिस्टल लेकर आए थे। क्रो ने इस मुलाक़ात के बारे में एक किताब लिखी है, जिसमें पूरी घटना का ब्यौरा दिया है। एल्विस प्रेस्ले ने अपने रॉक बैंड बीटल्स को अमरीका के लिए ख़तरा बताया तो राष्ट्रपति निक्सन ने कहा कि जो लोग ड्रग लेते हैं वो भी अमरीकी भावना के दुश्मन हैं। फिर एल्विस ने राष्ट्रपति को इस मुलाक़ात की असल वजह बताई। एल्विस चाहते थे कि राष्ट्रपति उन्हें अमरीका की एंटी ड्रग एजेंसी का एजेंट बना दें। इससे उन्हें कई अधिकार हासिल हो जाएंगे। निक्सन ने एल्विस को एंटी ड्रग एजेंसी का पुलिस बैज दिलवा दिया। मुलाक़ात के आख़िर में एल्विस प्रेस्ले को गले लगाया।
इस मुलाक़ात की तस्वीरें आज अमरीका के नेशनल आर्काइव्स या राष्ट्रीय अभिलेखागार में मौजूद हैं। मगर दोनों की मीटिंग की एक ख़ास तस्वीर में लोगों की दिलचस्पी कुछ ज़्यादा ही है। निक्सन म्यूज़ियम संभालने वाले ग्रेगरी कमिंग कहते हैं कि दोनों अपने-अपने क्षेत्र की बिल्कुल अलग तरह की हस्तियां हैं। राष्ट्रपति निक्सन को पॉप या रॉक कल्चर के बारे में कुछ नहीं मालूम था। वहीं एल्विस प्रेस्ले को पॉलिटिक्स का भी कुछ नहीं पता था। शायद ये विरोधाभास ही लोगों की दिलचस्पी की बड़ी वजह है।
दोनों के बीच का ये अलगाव भी दोनों के आपसी लगाव की वजह बन गया। दोनों ही दिग्गज दिल खोलकर एक दूसरे से मिले। एल्विस के साथ व्हाइट हाउस जाने वाले उनके क़रीबी दोस्त जेरी शिलिंग कहते हैं कि अपने ज़माने के वो दो दिग्गज थे। जब वो मिले तो दोनों अपने करियर के शिखर पर थे। सबसे ऊंची पायदान पर खड़े होकर दोनों को अकेलापन महसूस होता होगा। इसीलिए जब वो मिले तो मिलते ही बेतकल्लुफ़ हो गए। अमरीकी समाज में रिचर्ड निक्सन और एल्विस प्रेस्ले, दोनों का नाम अमर है। क़िस्से-कहानियों में, नाटकों में, फ़िल्मों में, टीवी सीरियल्स में। दोनों के किरदार हर तरह से पेश किए गए हैं। कभी मज़ाक़ में तो कभी बहुत गंभीरता से। दोनों की मुलाक़ात पर बनी ताज़ा फ़िल्म, इस मीटिंग को मज़ाक़िया तरीक़े से पेश करने की कोशिश है। ये दिखाने की कोशिश है कि जब दो एकदम अलग तरह के लोग मिलते हैं तो क्या होता है।
ग्रेगरी कमिंग कहते हैं कि किसी अमरीकी राष्ट्रपति और किंग ऑफ़ रॉक की मुलाक़ात की ऐसी दूसरी तस्वीर कहीं नहीं मौजूद है। ये एक बेशक़ीमती ख़ज़ाना है। आज की तारीख़ में हर राजनेता, फ़िल्म या संगीत की दुनिया के दिग्गजों से ताल्लुक़ बनाना चाहता है। कम से कम पब्लिक की नज़र में नज़दीक़ी दिखाना चाहता है। मगर, सत्तर के दशक में ये चलन नहीं था। नेताओं का संगीत की दुनिया से कोई वास्ता नहीं था। इसीलिए निक्सन और प्रेस्ले की मुलाक़ात की ये तस्वीर बेहद लोकप्रिय हो गई। ये उस दौर के लिहाज़ से एकदम अलग तरह का मौक़ा था। आज तो डोनाल्ड ट्रम्प का राष्ट्रपति के तौर पर ओवल ऑफ़िस में मौजूद होना ज़्यादा चौंकाने वाली तस्वीर होगी।