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क्या मेरे सिर पर गिरेगा क्षुद्रग्रह?

Sat, 15 Dec 2012 02:32 PM IST
बीबीसी हिंदी/डेविड श्पिगल हॉल्टर
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एक रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि क्षुद्रग्रह गिरने से सालाना 91 लोग मारे जाते हैं। हो सकता है कि अंतरिक्ष से धरती की ओर आ रहे किसी ऐसे ही क्षुद्रग्रह पर आपका नाम लिखा हो। अब सवाल ये है कि असल में इसकी संभावना आखिर कितनी है।
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बीमा, मेडिकल टेस्ट, गाड़ी ठीक से चलाना, ये कुछ ऐसे उपाए हैं जिन्हें हम अपने बचाव के लिए करते हैं, लेकिन असल में ये सब बेकार हैं अगर आसमान से आ रहे किसी क्षुद्रग्रह या कहें किसी चट्टान पर आपका ही नाम लिखा हो।

हाल ही में 2012 बी एक्स-34 नाम का एक क्षुद्रग्रह धरती के वायुमंडल के 60,000 किलोमीटर करीब से गुजरा था। क्या होता अगर ये हमारे सिर पर आ गिरता?

एक अद्भुत रिपोर्ट में अमेरिका की राष्ट्रीय शोध काउंसिल कहती है कि औसतन हर साल 91 लोग क्षुद्रग्रह से मरते हैं। ये संख्या काफी सटीक है लेकिन इसके बारे में छानबीन करना भी जरूरी है।
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सोचिए पिछली बार आपने कब सुना था कि कोई क्षुद्गग्रह धरती से टकराया है। इस बारे में आपने शायद अख़बारों में कुछ पढ़ा होगा।

ऐसा ही एक क्षुद्रग्रह 30 जून 1908 को गिरा था जिसका विस्फोट साइबेरिया के जंगलों से 10 किलोमीटर ऊपर आसमान में हुआ था।

इसकी वजह से 1600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के पेड़ उखड़ गए थे। उस वक्त इस घटना पर लोगों ने कोई खास ध्यान नहीं दिया था क्योंकि जंगल बहुत सुदूर था और उसमें किसी इंसान की जान नहीं गई थी।

आसमान से गिरती मौत?
गणनाएं बताती हैं कि यही क्षुद्रग्रह अगर चार घंटे 47 मिनट बाद गिरा होता जो निशाने पर रूस का सेंट पीटर्सबर्ग शहर होता और तब ये घटना बहुत मायने रखती। खास तौर पर इसलिए भी क्योंकि ये वक्त रूस के इतिहास के लिए काफी संवेदनशील था।

अगर इस तरह का विस्फोट न्यूयॉर्क के ऊपर हुआ होता तो दस खरब डॉलर का नुकसान होता। इतना ही नहीं, 32 लाख लोगों की जान जाती और 37 लाख लोग घायल होते।

लेकिन ऐसा हुआ नहीं। असल में ये बड़ा आश्चर्यजनक है कि क्षुद्रग्रह से जुड़ी मौतों के बहुत कम मामले हैं। कुछ मामलों में अमरीका में कुछ कारों को नुकसान जरूर पहुंचा और साल 1972 में वेनेजुएला में एक गाय की मौत हो गई थी। हाल ही में पेरिस के एक घर के सामने अंडे के आकार का क्षुद्रग्रह गिरा था।

खतरे पर नासा की नजर
आसमान से गिरने वाले धूमकेतु या क्षुद्रग्रह विभिन्न आकार-प्रकार के होते हैं और इसी आधार पर इनसे नुकसान की आशंका होती है। इसी आधार पर इन्हें वर्गीकृत किया जाता है।

अगर कोई धूमकेतु धरती और सूरज के बीच की एक तिहाई दूरी यानी 480 लाख किलोमीटर दूरी तय करे तो इसे 'नियर अर्थ ऑबजेक्ट' कहा जाता है।

अच्छी बात ये है कि इस तरह के 'नियर अर्थ ऑब्जेक्ट्स' पर नज़र बनाए रखने के लिए नासा एक परियोजना पर काम कर रहा है जो इस तरह के हर धूमकेतु पर नज़र बनाए रखता है। दिसंबर 2011 तक इस तरह के 8,500 'नियर अर्थ ऑब्जेक्ट' पाए गए हैं।

अगर कोई 150 मीटर चौड़ा धूमकेतु धरती और चांद के बीच की दूरी से 20 गुना ज्यादा दूरी से धरती के निकट से गुजरे तो उसे संभावित खतरनाक धूमकेतु माना जाता है।

5-10 मीटर तक चौड़े धूमकेतु साल में औसतन एक बार धरती की ओर आते हैं जिनसे बहुत जोरदार धमाकों के बराबर ऊर्जा पैदा होती है। ये उतनी ही ऊर्जा है जितनी ऊर्जा हिरोशिमा में परमाणु बम के विस्फोट के दौरान पैदा हुई थी।
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धूमकेतु की वजह से 91 लोगों की मौत का आंकड़ा सौ साल के आधार पर निकाला गया है। कुछ चुनिंदा मामले बड़े स्तर पर मौत के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि धूमकेतु या क्षुद्रग्रह के गिरने से किसी इंसान के मारे जाने की संभावना लाखों में एक के बराबर है।
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