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वॉशिंगटन डायरी: आईएस को इबोला से खतरा

Fri, 17 Oct 2014 12:39 PM IST
ब्रजेश उपाध्याय/बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
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मौसम बदलना प्रकृति का शाश्वत सत्य है। ये बात अमरीका की राजधानी वॉशिंगटन पर भी लागू होती है। लेकिन वहां सर्दी, गर्मी पतझड वगैरह के साथ ही कुछ और तरह के मौसम भी होते हैं जो समय-समय पर बदलते हैं।
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इन दिनों वॉशिंगटन में इबोला का मौसम है। इसकी ऐसी धूम है कि इबोला के झुमके, नेकलेस और टीशर्ट बेचे जा रहे हैं।

वॉशिंगटन के इस मौसम पर ब्रजेश उपाध्याय की डायरी।

वॉशिंगटन डायरी
वॉशिंगटन में मौसम बदल चुका है। पत्ते रंग बदलने लगे हैं।

गर्मी झांसा जरूर दे देती है। कभी-कभी चटक धूप के जरिए अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाकर कहती है मैं अभी खत्म नहीं हुई।

लेकिन दरवाजे से बाहर निकलते ही हवा की खुनकी उस दावे को झुठला देती है।

एक हफ्ता और गुजरेगा, बचे-खुचे हरे पत्ते लाल-पीले रंगों में सराबोर हो जाएंगे और फिर कुछ ही दिनों में हमेशा के लिए पेड का साथ छोड देंगे जमीन को चूमने के लिए। पेड मातम के माहौल में चले जाएंगे।

लेकिन ये तो हर साल की रूटीन है। अगले साल और फिर उसके अगले साल भी कुछ ऐसा ही होगा।
बदलते मौसम

लेकिन वॉशिंगटन के असली मौसम के बारे में शायद ही कोई इतना यकीन से कुछ कह सके। जिस तेजी से बिना किसी वॉर्निंग के वो बदलता है उस तेजी से तो गिरगिट भी रंग नहीं बदलता। कहां से आएगा, कहां को जाएगा, इसकी किसी को भनक नहीं होती।
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चार-पांच साल पहले जब मैं यहां था तो यहां उन दिनों पाकिस्तान का मौसम था। कांग्रेस में पाकिस्तान, व्हाइट हाउस में पाकिस्तान, थिंक टैंक में पाकिस्तान, अखबारों में पाकिस्तान, किताब की दुकानों में पाकिस्तान। काफी लंबा चला था वो मौसम।

लेकिन ओसामा बिन लादेन ने पाकिस्तान और दुनिया क्या छोडी, अमरीका से पाकिस्तान का मौसम ही लेकर चले गए।

दो हफ्ते पहले मोदी का मौसम आया था। कौन है मोदी, क्या है मोदी, क्या देगा मोदी, क्या लेगा मोदी—मौसम का हर रंग वॉशिंगटन में नजर आ रहा था। अब वो भी खत्म हुआ।

अब तो जो मौसम पूरी जवानी के साथ उतरा है वॉशिंगटन में वो है इबोला का मौसम। सुबह अच्छा-भला उठता हूं लेकिन अखबार और टीवी देखने के बाद जब घर से बाहर निकलता हूं तो हर इंसान को घूर रहा होता हूं कि कहीं उसे इबोला तो नहीं है।

सुना है स्कूल में बच्चे किसी को खांसता हुआ सुनते हैं तो एक साथ आवाज लगाने लगते हैं इबोला-इबोला।

'होला इबोला'
कल तक यहां आइसिस यानि इस्लामिक स्टेट से खतरे का मौसम था।

बरसाती मेंढकों की तरह हर कोने से विश्लेषक बाहर निकल आए थे हजारों मील दूर चल रही लडाई से अमरीकी होमलैंड को सुरक्षित करने के उपाय बताने।

बेचारे इस्लामिक स्टेट को आज अगर सबसे ज्यादा किसी से खतरा है तो वो इबोला से। अंदर के पन्नों पर धकेला जा चुका है। ये हालात रहे तो पूरे अखबार से ही बाहर हो जाएगा।

चले थे पूरी दुनिया पर राज करने और एक छोटे से कीडे ने औकात बता दी!

इबोला झुमके-टीशर्ट
इतने बडे मुल्क अमरीका में अभी तक तीन लोगों के बारे में पता है कि उन्हें इबोला हुआ है। लेकिन टीवी कवरेज देखकर, कांग्रेस में इस मामले पर चल रही सुनवाई देखकर, ओबामा के बयान सुनकर लग रहा है जैसे ये अमरीका नहीं अफ्रीका हो।

और इस जुनून में सारे अफ्रीका को भूल ही गए हैं जहां हर रोज हजारों इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। अगर कुछ ऐसी ही तैयारी वहां करवा देते और इबोला को अफ्रीका में ही रोक देते तो कुछ भला होता।

इबोला के मौसम की ऐसी धूम है कि एक कंपनी ने इबोला के झुमके, इबोला के नेकलेस और यहां तक कि इबोला की तस्वीर वाले डिनर प्लेट्स बेचने शुरू कर दिए हैं। टीशर्ट पर लिखा हुआ है “होला इबोला” यानि हेलो इबोला।
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अब तो बस देखना है कि ये मौसम और कितने दिन चलेगा और अगला मौसम क्या लेकर आएगा।
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