अमेरिका ने इराक में पुननिर्माण कार्य के लिए 60 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किए लेकिन एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इसका नतीजा वो नहीं निकला जो अमेरिका चाहता था।
इराक में पुननिर्माण कार्य की देखरेख करने वाले एक महानिरीक्षक द्वारा दी गई आखिरी रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने इस पूरे अभियान में कम से कम आठ अरब डॉलर का नुकसान उठाया है।
इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले स्टूअर्ट बॉवन ने इन सीमित नतीजों के लिए भ्रष्टाचार, खराब सुरक्षा व्यवस्था और इराक़ी अधिकारियों के साथ अपर्याप्त बोलचाल को दोषी ठहराया है।
तकरीबन आठ साल तक इराक में चली इस लड़ाई में अमेरिका ने कुल लगभग 800 अरब डॉलर खर्च किए और पांच हजार से ज्यादा लोगों की जानें गईं।
'इन लर्निंग फ्रॉम इराक'
अमेरिकी संसद को दी गई अपनी आखिरी रिपोर्ट 'इन लर्निंग फ्रॉम इराक' में स्टूअर्ट बॉवन ने लिखा है कि इराक में मिली असफलता अमेरिका के लिए एक सबक है, जो उसे आगे इस तरह के किसी भी पुननिर्माण के काम को शुरु करने से पहले सचेत करेगी।
अमेरिका ने साल 2014 के अंत तक अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज को हटाने का फैसला किया है। ये रिपोर्ट इराक के विभिन्न शहरों और इलाकों में की गई जांच-पड़ताल और लेखा-परीक्षण के आधार पर किया गया है। इस दौरान कई अमेरिकी अधिकारियों और राजनेताओं से भी बातचीत की गई।
बॉवन के अनुसार लोगों के मन में एक आम राय ये है कि इस पुननिर्माण कार्य के और बेहतर नतीजे आने चाहिए थे और इसमें अमेरिका को काफी नुकसान हुआ है।
योजना का अभाव
इराक के प्रधानमंत्री नौउरी अल-मलीकी ने स्टूअर्ट बॉवन से कहा कि इस पूरे अभियान के दौरान अमेरिकी पैसे की काफी बर्बादी हुई है।
मलीकी के अनुसार अमेरिका द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम से इराक़ में कई बड़े बदलाव लाए जा सकते थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इराकी संसद के स्पीकर और देश के शीर्ष सुन्नी अधिकारी ओसामा अल-नुजाफी के अनुसार पुननिर्माण की इन योजनाओं के कई अनचाहे नतीजे सामने आए हैं।
जबकि कुर्द अधिकारी कुबद तालाबानी ने लेखा परिक्षकों से कहा कि आपको ऐसा लगता है कि अगर कहीं समस्या है तो उसे पैसा फेंककर ठीक किया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है। यहां कुछ भी योजनाबद्ध तरीके से नहीं किया गया था।
प्रमुख रिपब्लिकन सिनेटर बॉब कोर्कर ने विदेशी संबंधों का काम-काज देखने वाली समिति से कहा कि इस रिपोर्ट में जो कुछ लिखा गया है कि वो स्तब्ध करने वाला है और इससे हमें सबक लेने की ज़रुरत है ताकि हम अफगानिस्तान में दोबारा ऐसी ग़लती ना दोहराएंद।
अमेरिका ने 12 साल की अवधि में अफगानिस्तान में अपनी सैन्य उपस्थिती के दौरान पुननिर्माण में 90 अरब डॉलर रुपये खर्च किए हैं।