अमेरिका भारत समेत विभिन्न देशों में सूचना के मुक्त प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए डाटा को स्थानीय सर्वर में संग्रहीत करने की नीति पर रोक चाहता है। अमेरिका की शीर्ष आईटी कंपनियों ने डाटा के स्थानीयकरण संबंधी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हालिया दिशा-निर्देशों के खिलाफ विरोध जताया है।
डाटा के स्थानीयकरण का मतलब है, आंकड़ों को उसी देश में संग्रहीत करना, जहां से वह जुड़ा है। आरबीआई ने अप्रैल, 2018 में जारी सर्कुलर में भुगतान सेवा देने वाले सभी कंपनियों को सुनिश्चित करने को कहा था कि भुगतान संबंधी सभी डाटा का संग्रहण भारत में ही स्थापित एक प्रणाली में करना होगा। आरबीआई ने ऐसा करने के लिए कंपनियों को 15 अक्तूबर तक की मोहलत दी थी।
माना जा रहा है कि आरबीआई के दिशा-निर्देशों के खिलाफ अमेरिकी कंपनियों ने ट्रंप प्रशासन से संपर्क किया है। अमेरिका के उप व्यापार प्रतिनिधि और डब्ल्यूटीओ में अमेरिका के राजदूत डेनिस ने कहा, ‘हम एक सीमा से दूसरी सीमा तक सूचना और डाटा के मुक्त प्रवाह के लिए आंकड़ों के स्थानीयकरण पर रोक चाहते हैं। हम डिजिटल ट्रांसमिशन के लिए कर या शुल्क पर स्थायी प्रतिबंध चाहते हैं।’
डेनिस ने कहा, हम चाहते हैं कि दक्षिण अफ्रीका और भारत इन शुल्कों पर रोक के बारे में नए सिरे से सोचे।