अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी स्तर की बैठकों के लिए अपना समर्थन जाहिर करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सीधी वार्ता इन दोनों पड़ोसी देशों और पूरे क्षेत्र के लिए अच्छी है।
विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता मार्क टोनर ने कहा, ‘हम भारत और पाकिस्तान के बीच ऐसे हर प्रयास का पुरजोर समर्थन करते हैं, जो एक ज्यादा स्थाई और समृद्ध क्षेत्र के लिए योगदान दे सकता है। इन प्रयासों में भारतीय और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच किसी भी स्तर की बैठक भी शामिल है।’ उन्होंने मंगलवार को कहा, ‘लंबे समय से हमारा रुख यही रहा है कि संबंधों के सामान्य होने से और व्यावहारिक सहयोग से भारत और पाकिस्तान दोनों को लाभ मिलना है। विदेश विभाग का यह बयान भारत द्वारा पाकिस्तान की ओर से कश्मीर पर विदेश सचिव स्तर की वार्ता के लिए दिए गए प्रस्ताव को ठुकराने के कुछ दिन बाद आया है।
कश्मीर में जारी हिंसा को लेकर अमेरिका ने कहा है कि इस मामले पर संबंधित पक्षकारों को निर्णय करना होगा। अमेरिका के राजदूत रिचर्ड वर्मा ने एक समाचार वेबसाइट को एक इंटरव्यू में यह बात कही है। वर्मा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बलूचिस्तान पर बयान को लेकर सवाल पूछे गये थे। वर्मा ने कहा, ‘ये प्रधानमंत्री का अपना नजरिया हो सकता है।’ कश्मीर में हालातों को लेकर वर्मा ने कहा, ‘कश्मीर में बढ़ते तनाव की बात करें तो यह हमारी लंबे समय से नीति रही है कि मामले को संबंधित पक्षकारों के पास सुलझाने के लिए छोड़ देना चाहिए।’ जब उन्हें कहा गया कि आखिर अमेरिका पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद पर चिंता क्यों नहीं जाहिर करता। तो वर्मा ने कहा, ‘हम इस सलाह से असहमति जताते हैं।’
अमेरिकी राजदूत ने कहा, ‘पिछले 15 साल में अमेरिका के विभिन्न प्रशासनों ने आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाया है। मुझे नहीं लगता कि आतंकवाद को लेकर अमेरिका अपनी प्रतिबद्घता से पीछे हटा हो।’ वर्मा ने कहा कि आतंकवाद से मुकाबला बड़ा मुद्दा है। अमेरिका भी भारत की तरह आतंकवाद से पीड़ित है। 9/11 की आतंकवादी घटना के बाद अमेरिका ने आतंकवाद के विभिन्न रूपों को झेला है।