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हिलेरी Vs ट्रंप: TRP के पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है इस बार की महाबहस

Tue, 27 Sep 2016 07:32 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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ट्रंप और हिलेरी क्लिंटन
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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर होने वाली पहली आम बहस भारतीय समयानुसार मंगलवार सुबह साढ़े छह बजे होगी। अमेरिकी चुनावों की बेहद चर्चित ये डिबेट पूरी दुनिया के लिए खास होगी, जिस पर सोशल मीडिया समेत अन्तरराष्ट्रीय मीडिया की निगाहें टिकी हुई हैं। न्यूयॉर्क के हेम्पस्टीड स्थित होफस्ट्रा विश्वविद्यालय में 90 मिनट की इस बहस का आयोजन होगा। यही वो जगह है, जहां पिछले राष्ट्रपति चुनावों में बराक ओबामा और उनके विरोधी जॉन मैक्केन और मिट रोमनी के बीच बहस आयोजित की गई थी। 
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अमेरिका की दो मुख्य राजनीतिक दल रिपब्लिकन पार्टी की ओर से डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन अमेरिका को लेकर अपना नजरिया लोगों के सामने रखेंगे। माना जा रहा है कि विश्व की महाशक्ति के तौर पर पहचान रखने वाले अमेरिका की यह प्रेजिडेंशियल डिबेट पिछले कई सालों के सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी।
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दोनों ही उम्मीदवारों के लिए अहम है बहस

रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ट्रंप के लिए यह डिबेट लिटमस टेस्ट की तरह होगी, क्योंकि ट्रंप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित होने से पहले ही विवादास्पद टिप्पणियों के लिए चर्चा में रहे हैं। ऐसे में अमेरिका की जनता को डिबेट के माध्यम से यह तय करने में मदद मिलेगी की आखिर ट्रंप को वो राष्ट्रपति चुनना चाहते हैं या नहीं।

ट्रंप के लिए यह बड़ी चुनौती होगी कि वह खुद को राष्ट्रपति पद का बेहतर उम्मीदवार सिद्ध कर सकें। वहीं दूसरी ओर डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन से उम्मीद है कि वह बेहद गंभीर मुद्दों को अपने तर्कों के जरिए लोगों के सामने रखेंगी। हिलेरी अपनी भाषण शैली का फायदा इस डिबेट में ले सकती हैं। ट्रंप के लिए यह भी अहम होगा कि वह बिना आपा खोए 90 मिनट की अवधि तक क्लिंटन से बहस करें। लोगों को सीधे जोड़ने वाले टैक्स और सुरक्षा के मुद्दों पर ट्रंप की कोई खास मजबूती नहीं है। ऐसे में इन मुद्दों पर लेकर हिलेरी बाजी मार सकती हैं।

भारत के लिए क्यों खास है बहस

मोदी-ओबामा - फोटो : PTI
अमेरिका और भारत के रिश्ते दुनिया के लिए चर्चा का विषय रहे हैं। इस लिहाज से यह बहस भारत के लिए भी जरूरी है। अमेरिका का अगला राष्ट्रपति कौन होगा, इसमें यह आम बहस निर्णायक साबित होती है। आपको बता दें कि 1960 में अमेरिकी चुनावों के दौरान पहली बार इस तरह की आम बहस का आयोजन किया गया था, जिसके बाद लगातार राष्ट्रपति चुनावों में इस तरह की परम्परा का चलन हो गया। इसे वहां 'डायमंड्स ऑफ डेमोक्रेसी' भी कहा जाता है।
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किस तरह होगी डिबेट

- फोटो : getty images
यह बहस 15-15 मिनट के छह सेग्मेंट में बांटी गई है, जिसके लिए तीन थीम निर्धारित की गई हैं। हर एक सेग्मेंट में अमेरिकी की दिशा, हासिल समृद्धि, सुरक्षित अमेरिका जैसे तीन विषयों पर चर्चा होगी। इस डिबेट में एनबीसी के लेस्टर होल्ट मध्यस्थ की भूमिका में होंगे। 90 मिनट की इस पूरी डिबेट को बिना किसी व्यावसायिक विज्ञापन के लाइव प्रसारित किया जाएगा। हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में कई उम्मीदवार हैं, लेकिन ओपिनियल पोल में बेहतर स्थिति ना आने की वजह से वो लोग स्टेज का हिस्सा नहीं होंगे। इससे पहले जिमी कार्टर और रोनाल्ड रीगन के बीच 1980 में हुई बहस टीवी पर रिकॉर्ड बहस के रूप में सामने आई थी, जिसको आठ करोड़ अमेरिकी दर्शकों के द्वारा देखा गया था।
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