ऐसे विदेशी नागरिक जो अमेरिका के इंस्टीट्यूट से साइंस, टेक्नोलाजी, इंजीनियरिंग और गणित आदि में पीएचडी होल्डर हैं, उन्हें ग्रीन कार्ड और एच-1 बी वीजा नियमों से छूट मिल सकती है। प्रतिनिधि सभा में इस संबंध में एक बिल पेश किया गया है। अमेरिका में रोजगार में अमेरिकी नागरिकों को ही वरीयता देने के लिए ग्रीन कार्ड और एच-1 बी वीजा नियमों का सख्ती से पालन किया जा रहा है।
कांग्रेस में सांसद इरिक पॉल्सन और माइक क्विगली ने यह बिल पेश किया है। अमेरिका में प्रशिक्षित विदेशी लोगों को वीजा नियमों की वजह से बाहर जाने से रोकने के लिए पेश किए गए इस स्टेपल एक्ट बिल से भारतीयों को फायदा मिल सकता है। भारत के अधिकांश लोग अमेरिका में पीएचडी कर रहे हैं।
इरिक पॉल्सन ने कहा कि पूरी दुनिया के इंटेलीजेंट लोग उच्च स्तर का अध्ययन करने के लिए अमेरिका आते हैं। हमें ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि इनका अमेरिका के आर्थिक विकास में योगदान हो सके। अमेरिका में अभी भी बहुत सारे जॉब रिक्त हैं। स्टेपल एक्ट से अमेरिकी कंपनियों को योग्य लोग मिल जाएंगे। क्विगली ने कहा कि अगर अमेरिका वास्तव में अपने विकास को इसी गति से बरकरार रखना चाहता है तो इसे इस एक्ट के जरिए दुनिया के टैलेंट को अपने यहां मौका देना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि एच-1बी वीजा के नियमों से अमेरिका में अभी भी उच्च स्तर के जॉब में योग्य लोगों की कमी की वजह से भर्ती नहीं की जा सकी है। दोनों सांसदों का कहना है कि अध्ययनों से इन रिक्तियों का पता चला है। 2011 के एक इंस्टीट्यूट के अध्ययन के अनुसार एसटीईएम यानी साइंस, टेक्नोलाजी, इंजीनियरिंग, मैथमेटिक्स से अमेरिकन पीएचडी होल्डर 100 विदेशी नागरिक यहां अन्य 262 जॉब से जुड़े हुए थे। सांसदों ने इस अध्ययन का हवाला देते हुए ऐसे लोगों की उपयोगिता पर काफी बल दिया है।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1 वीजा नियमों को कड़ाई से लागू करने के आदेश दिए हैं। ट्रंप ने हायर अमेरिकन नियम के तहत सभी विभागों को इसे सख्ती से लागू करने को कहा है।