‘फ्रैगाइल फ्रंटीयर्स : दी सिक्रेट हिस्टरी ऑफ मुंबई आतंकी अटैक्स’ नाम की एक किताब ने खुलासा किया है कि लश्कर-ए-ताइबा ने आतंकी अजमल कसाब को कराची के समुंदर में तैरने की ट्रेनिंग दी थी। इतिहासकार सरोज कुमार राठ द्वारा लिखित इस किताब के अनुसार, उस दौरान कसाब को यह लगा कि इस ट्रेनिंग से उसे समुद्री सैनिक या मछुआरे की नौकरी मिल जाएगी। वहीं इस हमले से पहले एलईटी ने दो बार आतंकियों को भेजने की कोशिश की थी मगर सफल नहीं हो सके थे।
गोलीबारी करते हुए मुस्कुरा रहा था कसाब : रेलवे अनाउंसर
26/11 हमले के 10 साल बीत चुके हैं लेकिन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के रेलवे अनाउंसर विष्णु जेंदे के दिमाग में आज भी हाथ में बंदूक लेकर यात्रियों पर गोलियां बरसाते हुए कसाब का मुस्कुराता चेहरा बसा हुआ है। 47 वर्षीय जेंदे की सूझबूझ ने सैकड़ों यात्रियों की जान बचाई थी। कुल 166 मृतकों में से 52 की मौत रेलवे स्टेशन पर हुई थी जबकि 108 लोग घायल हुए थे।
मेजर संदीप उन्नीकृष्णन को उनके पिता ने किया याद
26/11 हमले के शहीद मेजर संदीप उन्नीकृष्णन की तस्वीरें कर्नाटक के उनके दो मंजिला घर में हर तरफ लगी हुई हैं। नेशनल सिक्योरिटी गार्ड कमांडो के पिता उन्नीकृष्णन ने कहा कि संदीप में हमेशा जीतने की इच्छा थी इसी वजह से उसे सचिन तेंदुलकर पसंद थे। वह चाहता था कि भारत हर मैच जीते और ऐसा नहीं होने पर निराश हो जाता था। वहीं जब कोई इसरो प्रोजेक्ट विफल हो जाता था तो वह मुझे सांत्वना देता था। उसे हारना नहीं पसंद था।
10 साल बाद अब आगे बढ़ने का समय : लियोपोल्ड कैफे
दक्षिण मुंबई के कोलाबा कॉजवे में स्थित मशहूर लियोपोल्ड कैफे 26/11 आतंकी हमले में निशाना बनने वाले पहले स्थानों में से एक था। वहां रेस्टोरेंट की दो कर्मचारियों के साथ कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। 10 साल बाद उसके मालिक फरहांग जेहानी ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम हमले की बुरी यादों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ें। इसके बारे में काफी कुछ बोला और लिखा जा चुका है, अब और कुछ कहने को नहीं है।
26/11 हमले की दिल दहला देने वाली तस्वीरें लेने वाले फोटोपत्रकार सेबस्टियन डिसूजा की तस्वीरों ने कसाब को फांसी पर चढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि स्टेशन के पास मौजूद पुलिसवालों की दो बटालियन ने अगर कसाब और उसके साथियों को मार गिराया होता तो कई जानें बच जाती लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। हाथ में एक-47 लिए हुए कसाब की क्लोज-अप तस्वीर लेने के लिए 67 वर्षीय सैबी को वर्ल्ड प्रेस फोटो अवार्ड से नवाजा जा चुका है। उस फोटो को उन्होंने ट्रेन के डिब्बे में छुपकर ली थी।
पूर्व बसपा सांसद ने याद की 26/11 की भयावहता
26/11 आतंकी हमले को 10 साल बीच चुके हैं लेकिन बसपा के पूर्व सांसद लालमनी प्रसाद के लिए वह घटना आज भी ताजा है और इस घटना ने उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। हमले के प्रत्यक्षदर्शी रहे प्रसाद को आज भी याद है कि कैसे हर कोई गोलियों से अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहा था। उस दौरान वे एक आधिकारिक बैठक के लिए ताज होटल में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि उनसे मिलने आने वाले तीन लोग भी उस दिन हादसे का शिकार हुए थे। वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि 48 घंटे तक फंसे रहने के बाद एनएसजी कमांडो ने उन्हें जिंदा बचा लिया।
घटना :
- कराची से नाव के रास्ते मुंबई में घुसे
- 10 आतंकियों ने दिया हमले को अंजाम
- 9 आतंकी मार गिराए गए, कसाब को फांसी
- 3 दिन चले आतंक में विदेशी सहित 166 लोगों की मौत