अमेरिका में भारतीय राजदूत नवतेज सिंह सरना ने कहा है कि शीत युद्ध के बाद के दौर में भारत और अमेरिका को एक साथ लाने में 9/11 के आतंकवादी हमले और वाई2के समस्या ने अहम भूमिका निभाई। सरना ने वाशिंगटन में एक कार्यक्रम में कहा कि पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद अमेरिका ने भारत पर प्रतिबंध लगा दिए थे। उसके बाद दोनों देश बातचीत शुरू कर रहे थे।
मई , 1974 के बाद मई , 1998 में भारत ने दूसरी बार पोखरण में परमाणु परीक्षण किए थे। सरना एक शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज ( सीएसआईएस ) के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वे दिन वाई 2के वाले दिन थे और अचानक भारतीय कम्प्यूटर इंजीनियरों ने समस्याओं का हल निकालना शुरू कर दिया। उन्होंने पूरे अमेरिका में चीजों को दुरुस्त किया।
उस समय करीब 15 लाख भारतीय यहां थे। इसके बाद अस्पतालों और कंपनियों के अलावा अन्य स्थानों पर भी उनकी मांगें बढ़ने लगी। वहीं से चीजों की शुरुआत हुई। वाई2के साल 2000 की शुरुआत के समय कम्प्यूटर कोडिंग सिस्टम से जुड़ी परेशानी थी। उस समय माना जा रहा था कि इससे पूरी दुनिया में कम्प्यूटर नेटवर्क प्रभावित हो जाएगा। इसके बाद 2001 में 11 सितंबर की आतंकवादी घटना हुई।
हम पिछले तीन दशक से सीमा पार आतंकवाद और आतंक की बुराई को जान रहे थे। सरना ने कहा कि अब भारत ऐसे स्थान पर है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी कांग्रेस में खड़े हो सकते हैं। जैसा 2016 में उन्होंने किया था और कह सकते हैं कि दोनों देशों ने इतिहास की बाधाओं को दूर कर लिया है।