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भारत की नकारात्मक छवि पेश न करे अमेरिकी मीडियाः भारतीय राजदूत

Wed, 16 May 2018 06:28 AM IST
एजेंसी, वाशिंगटन
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Navtej Sarna
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अमेंरिका में एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय राजदूत नवतेज सरना ने भारत की खराब छवि पेश करने के लिए अमेरिकी मीडिया की कड़ी आलोचना की है। सरना ने आरोप लगाया कि भारत में मौजूद विदेशी पत्रकारों के बीच यह रुझान है कि वे भारत में विकास की खबरों को छोड़कर ‘अपवाद’ खबरें चुनते हैं।

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अमेरिका की मुख्यधारा की मीडिया में भारत की छवि संबंधी सवाल पर सरना ने कहा, ‘यह तरस से अधिक चिंता की बात है। भारत आगे बढ़ रहा है लेकिन आप लोग आगे नहीं बढ़ रहे हैं।’ सरना ने कहा कि अमेरिकी मीडिया विकास की खबरों को दरकिनार कर ‘अपवाद’ खबरों को चुनता है।

 अमेरिका में भारत के शीर्ष राजनयिक सरना ने कहा, ‘भारत में स्टार्ट अप की खबरें भी हैं लेकिन अभी भी दहेज प्रथा, जातिगत मुद्दों संबंधी खबरों को पेश किया जाता है। यह हर जगह हो रहा है। मैं साफ तौर पर कहना चाहूंगा कि यह मुझे चिंतित करता है। मैं अब इसका आदि हो गया हूं।’
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 सरना ने कहा कि इस तरह भारत की छवि पेश करना यहां की जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि हम ऐसे समय में हैं जब राष्ट्रपति ट्रंप घोषणा कर सकते हैं कि भारत और अमेरिका के संबंध इतने मजबूत और बेहतर कभी नहीं थे।

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शीत युद्ध के बाद भारत, अमेरिका को साथ लाए 9/11 और वाई2के : सरना

अमेरिका में भारतीय राजदूत नवतेज सिंह सरना ने कहा है कि शीत युद्ध के बाद के दौर में भारत और अमेरिका को एक साथ लाने में 9/11 के आतंकवादी हमले और वाई2के समस्या ने अहम भूमिका निभाई। सरना ने वाशिंगटन में एक कार्यक्रम में कहा कि पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद अमेरिका ने भारत पर प्रतिबंध लगा दिए थे। उसके बाद दोनों देश बातचीत शुरू कर रहे थे।

मई , 1974 के बाद मई , 1998 में भारत ने दूसरी बार पोखरण में परमाणु परीक्षण किए थे। सरना एक शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज ( सीएसआईएस ) के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वे दिन वाई 2के वाले दिन थे और अचानक भारतीय कम्प्यूटर इंजीनियरों ने समस्याओं का हल निकालना शुरू कर दिया। उन्होंने पूरे अमेरिका में चीजों को दुरुस्त किया।

 उस समय करीब 15 लाख भारतीय यहां थे। इसके बाद अस्पतालों और कंपनियों के अलावा अन्य स्थानों पर भी उनकी मांगें बढ़ने लगी। वहीं से चीजों की शुरुआत हुई। वाई2के  साल 2000 की शुरुआत के समय कम्प्यूटर कोडिंग सिस्टम से जुड़ी परेशानी थी। उस समय माना जा रहा था कि इससे पूरी दुनिया में कम्प्यूटर नेटवर्क प्रभावित हो जाएगा। इसके बाद 2001 में 11 सितंबर की आतंकवादी घटना हुई। 

हम पिछले तीन दशक से सीमा पार आतंकवाद और आतंक की बुराई को जान रहे थे। सरना ने कहा कि अब भारत ऐसे स्थान पर है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी कांग्रेस में खड़े हो सकते हैं। जैसा 2016 में उन्होंने किया था और कह सकते हैं कि दोनों देशों ने इतिहास की बाधाओं को दूर कर लिया है। 
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