अमेरिका बिना हथियार वाले 22 प्रीडेटर गार्जियन ड्रोन देने के भारत के अनुरोध पर सकारात्मक फैसला ले सकता है। सूत्रों ने यह जानकारी दी कि यह ड्रोन खास तौर से हिंद महासागर की निगरानी के लिए होगा। जून में भारत को एक प्रमुख रक्षा सहयोगी करार दिए जाने के बाद अमेरिका का यह कदम सामने आ रहा है।
भारत को प्रमुख रक्षा सहयोगी का दर्जा दिए जाने के कुछ सप्ताह के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी। भारतीय नौसेना ने फरवरी में 22 उच्च स्तरीय और कई अन्य अभियानों के लिए गार्जियन ड्रोनों की खरीद के लिए रक्षा मंत्रालय को एक आग्रह पत्र (एलओआर) भेजा था।
अमेरिका सरकार ने इस पर कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया है लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि भारत के अनुरोध पर अंतर एजेंसी प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासन का मानना है कि ऐसी बड़ी सैन्य बिक्री को मंजूरी दिए जाने से ‘भारत और अमेरिका के रक्षा संबंध को मजबूत करने’, और दोनों सेनाओं के बीच ‘एक नए स्तर की सहजता’ लाने में मदद मिलेगी।