अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और नए बदलाव में एच-1बी वीजा धारकों के ‘उल्लेखनीय’ योगदान की बात कहते हुए शीर्ष अमेरिकी सांसदों ने मंगलवार को ट्रंप प्रशासन के उस फैसले का समर्थन किया जिसमें कहा गया है कि अमेरिका ऐसे किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रहा है जिससे एच-1बी वीजा धारकों को देश छोड़ने के लिए दबाव डाला जाए।
कांग्रेस में भारत एवं भारतीय-अमेरिकियों की द्विदलीय कॉकस की सह-अध्यक्ष व
डेमोक्रेटिक सांसद तुलसी गबार्ड ने कहा कि एच-1बी वीजा धारकों को देश छोड़ने के लिए मजबूर करने जैसे प्रस्ताव का समर्थन नहीं करने का ट्रंप प्रशासन का फैसला एक सकारात्मक भावी कदम है। उन्होंने कहा कि एच-1बी वीजा धारकों में अधिकांश लघु कारोबार करते हैं और रोजगार पैदा करने, नई खोजों, नए बदलाओं को बढ़ाने के साथ ही साथ हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में उल्लेखनीय मदद करते हैं।
वहीं दूसरी ओर भारतीय-अमेरिकी राजनीतिज्ञ राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा विभाग के नए फैसले से अमेरिकी व्यवसायियों और कर्मचारियों को परेशानी से बचाया जा सकेगा। यह प्रस्ताव अमेरिका के हित में नहीं था। मुझे खुशी है कि ट्रंप प्रशासन ने हमारी बात सुनी। उन्होंने आगे कहा कि एच-1बी वीजा विस्तार को खत्म करने के प्रस्ताव के जरिए नियमों में बदलाव से अमेरिकी कारोबारियों, कर्मचारियों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा और इनके परिवार भी बंट जाएंगे।