भारतीय स्वतंत्रता दिवस के ठीक एक दिन बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को करारा झटका दिया है। हिजबुल सरगना सैयद सलाहुद्दीन को इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित करने के एक महीने बाद ही अमेरिका ने कश्मीर में सक्रिय हिजबुल मुजाहिदीन को विदेशी आतंकी संगठन घोषित करते हुए उसे प्रतिबंधित सूची में डाल दिया है। अमेरिका ने यह फैसला पिछले दिनों कश्मीर में हिजबुल की बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों के चलते लिया है।
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विदेशी आतंकी संगठन घोषित होने के बाद हिजबुल मुजाहिदीन को अमेरिका की तरफ से कई तरह के वित्तीय प्रतिबंधों का सामना करना होगा। इस फैसले के बाद अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में आने वाली हिजबुल की सभी प्रॉपर्टी और उससे जुड़े उसके हितों पर रोक लग जाएगी। अमेरिका का कोई भी शख्स इस समूह के साथ किसी तरह का लेनदेन नहीं कर सकेगा।
दो महीने की अंदर पाकिस्तान को दूसरा झटका
बता दें कि अमेरिका की तरफ से दो महीने की अंदर पाकिस्तान को ये दूसरा झटका दिया गया है। इससे पहले जून में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिजबुल के सरगना सैयद सलाहुद्दीन को इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित कर पाक को करारा झटका दिया था।
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अमेरिका के इस कदम को भारत के साथ करीबी बढ़ाने की रणनीति रुप में देखा जा रहा है। अमेरिका ने ये ऐलान ऐसे वक्त पर किया है जब भारत, चीन के साथ बॉर्डर पर तनावपूर्ण माहौल का सामना कर रहा है और डोकलाम सीमा विवाद को लेकर चीन की तरफ से आए दिन भारत को धमकी भरे बयान दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं हिजबुल मुजाहिदीन के खिलाफ कार्रवाई करके अमेरिका ने यह भी संदेश देने का प्रयास किया है कि आंतकी मुद्दे पर वह किसी चीन का किसी भी तरह से समर्थन नही करेगा।
आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूती
अमेरिका के इस कदम का भारत ने स्वागत करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई और मजबूत हो रही है तथा आतंकियों और उन्हें पनाह देने वालों के हौसले पस्त हो रहे हैं। अमेरिका के इस कदम से इस लड़ाई को और ज्यादा बल मिलेगा।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा, ‘‘हिजबुल मुजाहिदीन को आतंकी हमले में इस्तेमाल किए जाने वाले संसाधनों पर लगाम लगाने की कोशिशों के तहत उसे आतंकी समूह घोषित किया गया है।’’ विदेश विभाग ने कहा कि आतंकवाद से जुड़ा घोषित होने से संगठन और व्यक्ति बेनकाब होते हैं और अलग-थलग पड़ जाते हैं। इसके साथ ही अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था तक उनकी पहुंच खत्म हो जाती है। इस कदम से अमेरिका और दूसरी सरकारों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मदद मिलती है। अमेरिका का यह फैसला पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है जो इस समूह को कश्मीरी लोगों की आवाज के तौर पर पेश करता आ रहा है।