शुक्रवार को व्हाइट हाउस ने बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस, ईरान और नॉर्थ कोरिया पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून पर हस्ताक्षर करेंंगे। ऐसा तब हुआ जब मॉस्को ने कहा कि वह दो अमेरिकी डिप्लोमेटिक संपत्तियों को जब्त कर रहा है।
अमेरिका द्वारा प्रतिबंध का कानून इसलिए बनाया गया क्योंकि आरोप है कि 2016 के राष्ट्रपति चुनावों में रूस ने दखल दिया था। शुक्रवार को व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी किया कि ट्रंप फाइनल वर्जन का रिव्यू करने के बाद बिल पर हस्ताक्षर करेंगे। वहीं ट्रंप ने रूस के अमेरिकी चुनावों में किसी भी तरह के दखल की बात को पूरी तरह से नकार दिया था।
गुरूवार को रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन ने कहा कि यह वाशिंगटन के आंतरिक राजनीतिक संघर्ष का परिणाम है, यह विधेयक मॉस्को विरोधी है। वहीं रूस के विदेश मंत्री सरजई लावरोव ने यूएस सचिव से कहा कि अमेरिका के साथ बड़े ग्लोबल मामलो पर बातचीत के लिए रूस तैयार है। रूस विदेश मंत्रालय ने बताया कि हमने बैलिस्टिक मिसाइल की रेंज के मामले में आम सहमति बनाई है।
अमेरिका ने पहले ही रूसी नागरिकों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगा रखे हैं। पिछले साल दिसंबर में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 35 रूसी अधिकारियों को वापस भेजने का निर्देश दिया था। वहीं रूस में तैनात अमेरिकन्स को हटाये जाने पर भी नाराजगी जताई गई।
हालांकि यह साफ नहीं है कि कितने अमेरिकी डिप्लोमेट्स को उनका पद छोड़ने पर मजबूर किया गया। लेकिन इंटरफेक्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक लगभग 100 लोग प्रभावित हुए। आपको बता दें कि ईरान और उत्तर कोरिया को उनके परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए अमरेका प्रतिबंध लगाना चाहता है।