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25 दिनों में ही ट्रंप के सुरक्षा सलाहकार फ्लिन का इस्तीफा

Tue, 14 Feb 2017 11:45 AM IST
बीबीसी हिंदी
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अमेरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल फ्लिन ने इस्तीफा दे दिया है। रूस के साथ कथित संपर्क की वजह से फ्लिन पर इस्तीफा देने का दबाव बढ़ता जा रहा था। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल फ्लिन के बारे में कुछ खबरों में कहा गया था कि उन्होंने ट्रंप के सत्ता संभालने से पहले अमेरीका में रूसी राजदूत से प्रतिबंधों के संबंध में चर्चा की थी।
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इसे विदेश नीति का उल्लंघन माना गया था। ये न सिर्फ अमरीकी विदेश नीति से जुड़े कानून का उल्लंघन था बल्कि फ्लिन ने उप-राष्ट्रपति माइक पेंस से भी कहा कि उन्होंने प्रतिबंधों से संबंधित कोई बात नहीं की थी।

माइक पेंस ने उनकी बातों पर यकीन करते हुए टीवी चैनलों के सामने जाकर कहा कि वो पूरे यकीन के साथ कह सकते हैं कि प्रतिबंधों के बारे में कोई बात नहीं हुई थी। पिछले हफ्ते कुछ अखबारों ने अमरीकी खुफिया अधिकारियों के हवाले से खबर दी कि प्रतिबंधों का भी जिक्र हुआ था और ये मामला फिर से सुर्खियों में आ गया।
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ट्रंप और रूस के बीच आ सकती है दूरी

वॉशिंगटन से बीबीसी संवाददाता ब्रजेश उपाध्याय का कहना है कि एक महीने के अंदर ही ट्रप प्रशासन के लिए ये एक दूसरा बड़ा झटका है। पहले, सात मुसलमान बहुल देशों से आनेवालों पर उनके लगाए प्रतिबंध पर अदालत ने रोक लगा दी और अब ट्रंप के बेहद करीबी समझे जानेवाले माइकल फ्लिन को भारी दबाव के अंदर इस्तीफा देना पड़ा है।

ट्रंप के लिए ये भी बड़ी चुनौती होगी कि अब वो रूस के प्रति किस तरह का रूख अपनाते हैं क्योंकि उन्होंने पूरे चुनाव अभियान के दौरान और फिर उसके बाद भी राष्ट्रपति पुतिन की तारीफ की थी। साथ ही उन्होंने रूस पर अमरीकी चुनाव में दखलअंदाजी करने के आरोपों को भी काफी हद तक नकारा था। साथ ही उन्होंने विदेश नीति और सुरक्षा मामलों पर एक करीबी सलाहकार खो दिया है।

फ्लिन ने अपने त्यागपत्र में कहा है उन्होंने ट्रंप के शपथग्रहण से पहले ही रूस के राजदूत के साथ कई बार टेलीफोन पर बातचीत की और उप-राष्ट्रपति को उसके बारे में "अधूरी जानकारी" दी। फ्लिन ने कहा कि उन्होंने उप-राष्ट्रपति से माफी मांग ली है और उन्होंने माफी को स्वीकार कर लिया है। देखा जाए तो हाल के दशकों में इतने कम समय में किसी नए प्रशासन के इतने उच्च अधिकारी के पद छोड़ने की मिसाल नहीं है। 
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डेमोक्रैट्स कर रहा था फ्लिन के इस्तीफे की मांग

ऐसी खबरें भी आ रही थीं कि फ्लिन ने उप-राष्ट्रपति से माफी मांगी थी, लेकिन डेमोक्रैट्स उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे। आरोप लगने के बाद से ही ट्रंप प्रशासन इस पर खामोश था, लेकिन सोमवार की शाम उनकी एक उच्च सलाहकार केलीऐन कॉनवे ने टीवी पर बयान दे दिया

कि फ्लिन को राष्ट्रपति ट्रंप का "पूरा विश्वास" प्राप्त है और उसके बाद यही लग रहा था कि विवादों के बावजूद फ्लिन अपने पद पर बने रहेंगे। लेकिन उसके एक घंटे के बाद ही व्हाइट हाउस के प्रवक्ता शॉन स्पाइसर ने बयान जारी किया कि ट्रंप पूरी "स्थिति का जायजा" ले रहे हैं।

कुछ दिनों से लगातार इस तरह की खबरें आ रही थीं कि व्हाइट हाउस के अंदर भी कई खेमे बन चुके हैं और सोमवार को दो घंटों के अंदर दिए अलग-अलग बयान कुछ हद तक उसकी पुष्टि कर रहे थे। माइकल फ्लिन चुनाव प्रचार के दिनों में ट्रंप के करीबी सहयोगियों में से थे। लेकिन ये मामला ऐसा था जिसमें देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने उप-राष्ट्रपति को झूठा बयान दिया था और इसलिए इस पर खासा हंगामा मचा।
 
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