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वीजा नीति पर भारतीयों के खिलाफ अमेरिका की भारत से मित्रता जरूरी

Sat, 21 Jan 2017 01:06 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Reuters
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ट्रंप की ताजपोशी से ठीक पहले पूरी दुनिया उनकी विदेश नीति को लेकर चिंतित रही। हालांकि शपथ की पूर्व संध्या पर ट्रंप ने अमेरिका को एकजुट रखने का वादा किया है। उन्होंने भारत के साथ अच्छे रिश्ते बनाने की बात भी कही, लेकिन चिंता की लकीरें अमेरिका में भी हैं और भारत समेत पूरी दुनिया में भी हैं। लेकिन भारत को लेकर यदि ट्रंप प्रशासन में चुनौतियां शामिल हैं तो अवसर भी कम नहीं होंगे। इसीलिए ट्रंप भारतीयों पर फिदा हैं।
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वाशिंगटन डीसी के लिंकन मेमोरियल के डिनर समारोह में बोलते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने देश में बदलाव का वादा किया। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर देश को एकजुट रखेंगे। ट्रंप ने अमेरिकियों के बीच नौकरियों के अवसर दोबारा पैदा करने, सेना में आत्मविश्वास भरने और सीमा को मजबूत करने का वादा भी किया। उन्होंने कहा कि हम वो काम करने वाले हैं जो पिछले कई दशकों से नहीं हुए हैं। सब कुछ बदलने वाला है, यह मेरा वादा है।

अमेरिकियों के लिए नौकरी के अवसर भारतीयों के लिए संकट खड़ा कर सकता है। ट्रंप का जोर विधेयक लाकर एच 1 बी वीजा को और सख्त करने पर है। भारत के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है। ट्रंप द्वारा कही गई बदलाव की बात पर पूरी दुनिया बेचैन है। ट्रंप की रूस के साथ जुगलबंदी दुनिया के  लिए चुनौती बन सकती है। इससे नाटो देश, इस्राइल, मध्य-पूर्व के देश, यूरोप और भारत भी प्रभावित होंगे।
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निकी हेली को तवज्जो से खुश हैं भारतवंशी

- फोटो : अमर उजाला
प्रतिष्ठित भारतीय अमेरिकी विद्वान व शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक के वरिष्ठ सहयोगी एश्ले टेलिस ने चेतावनी दी है कि ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति भारत के साथ उसके संबंधों को हानि पहुंचा सकती है। उन्होंने एशिया पॉलिसी पर छपे एक लेख में कहा कि जॉर्ज बुश प्रशासन के वक्त अमेरिका की भारत से घनिष्ठता इस आधार पर बनी थी कि दोनों देश चीन के बढ़ते कदम अमेरिकी वर्चस्व व भारत की सुरक्षा को चुनौती दे रहे थे।

इसके अलावा उभरती शक्ति के रूप में भारत की ओर अमेरिका की प्रतिबद्धता भी संतुलित थी, जो ओबामा प्रशासन में भी जारी रही। उन्होंने कहा कि ट्रंप की कुछ नीतियां भारत को अच्छे अवसर भी दे सकती हैं। खासतौर पर चीन को लेकर बनने वाली नीतियां।

भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के बहुत से अमेरिकी डेमोक्रेट समर्थक भी इस बार ट्रंप के खेमे में जुट गए थे। इनमें भारतीय मूल के अमेरिकी लोग इस बात से काफी खुश हैं कि निर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल की निकी हेली को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका का राजदूत बना दिया है।

इन भारतवंशियों को ट्रंप से कई उम्मीदें भी हैं जिनमें राजनीतिक के भीतर भ्रष्टाचार खत्म होने और आईएस के खात्मा शामिल है। अमेरिका में भारतवंशी कारोबारियों को ट्रंप से अर्थव्यवस्था में बेहतरी की उम्मीद है।  
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भारत को द्विपक्षीय समझौते का प्रस्ताव दे सकता है ट्रंप प्रशासन

ट्रंप - फोटो : ANI
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन भारत को द्विपक्षीय समझौते का प्रस्ताव दे सकता है। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति बहुपक्षीय व्यापारिक समझौतों पर भरोसा नहीं करते हैं और इनके खिलाफ भी हैं। उनका प्रशासन भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक समझौते में भरोसा रखता है और यह दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगा।

इस तरह समझौते का पहला प्रस्ताव अमेरिका के करीबी सहयोगी ब्रिटेन को दिया जा सकता है। इसके बाद ट्रंप प्रशासन इसी तरह का समझौता भारत के साथ भी कर सकता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब ट्रंप देश के 45वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं।

व्हाइट हाउस के नवनिर्वाचित प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने संवाददाताओं से कहा कि मुझे लगता है कि कारोबार के सिलसिले में राष्ट्रपति का संदेश एकदम साफ है। वह अमेरिकी कामगारों और अमेरिकी उत्पादन के लिए लड़ेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि वह द्विपक्षीय समझौतों के बारे में बात करते हैं लेकिन वह यह सुनिश्चित करेंगे कि जो भी समझौता हो, उसमें भी अमेरिकी कामगारों, अमेरिकी उत्पादन, अमेरिकी सेवाओं व अमेरिका को प्राथमिकता मिले।
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