ट्रंप ने कहा था कि इस ऐतिहासिक वार्ता के लिए जापान के प्रधानमंत्री
शिंजो आबे और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन बहुत सहायक रहे हैं। उन्होंने कहा था कि इस वार्ता से उत्तर कोरिया का भविष्य सुधरेगा। बता दें कि इस समिट को दुनियाभर के लगभग 2500 पत्रकार कवर करेंगे। इससे पहले इस वार्ता को लेकर अनिश्चितता का माहौल चल रहा था।
ट्रंप ने कहा था, "मैं बहुत अच्छे से तैयार हूं। मुझे नहीं लगता कि मुझे और ज्यादा तैयारी करने की जरूरत है। मुझे लगता है कि मैं समिट के लिए लंबे वक्त से तैयारी कर रहा हूं।" इससे पहले व्हाइट हाउस ने पुष्टि की थी कि दोनों नेताओं की मुलाकात सिंगापुर के सेनटोसा द्वीप पर होगी। समुद्री डाकुओं के अड्डे के नाम से मशहूर ये द्वीप सिंगापुर के 63 द्वीपों में से एक है।
12 जून को होने वाली इस वार्ता पर पूरी दुनिया की निगाहें रहेंगी। दोनों नेताओं के बीच बीते वक्त से काफी गरम माहौल देखा गया था। दरअसल अमेरिका चाहता है कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों को खत्म कर दे। जिस पर उत्तर कोरिया की ओर से जवाब में कहा गया था कि यदि अमेरिका उस पर ऐसा कोई दवाब डालेगा तो वह ये वार्ता रद्द् कर देगा। लेकिन दोनों देशों के अधिकारी काफी वक्त से इस समिट की तैयारियों में लगे हुए हैं। अब 12 जून के बाद ही पता चल पाएगा कि ये वार्ता दोनों देशों के साथ साथ विश्व शांति के लिए भी कितनी सार्थक सिद्ध होती है।
बता दें कि ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि वह इस बैठक के लिए अच्छे से तैयार हैं और इसके लिए बहुत ज्यादा तैयारी करने की जरूरत नहीं है। साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर समिट में सबकुछ ठीकठाक रहा तो वह किम जोंग उन को वाइट हाउस आने का न्योता भी देना चाहेंगे।