भारत और रूस के बीच हो रहे रक्षा सौदे को लेकर अमेरिका काफी चिंतित है। दोनों देशों के बीच एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम्स का अरबों रुपये का सौदा आखिरी चरण में है। इसी बीच ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को भारत को चेतावनी दी है और उसे रूस से हथियार खरीदने से मना किया है। अमेरिका का कहना है कि भारत और रूस के बीच होने वाले सौदे को महत्वपूर्ण सौदा माना जाएगा और इसी वजह से वह उसपर प्रतिबंध लगा सकता है। इससे पहले अमेरिका चीन पर प्रतिबंध लगा चुका है।
अमेरिका के विदेश और वित्त मंत्रालय ने चीन की सेना के उपकरण विकास विभाग और निदेशक ली शांगफू पर प्रतिंबध लगाए हैं क्योंकि उन्होंने रूस से एसयू-35 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और एस-400 सर्फेस टू एयर मिसाइल सिस्टम को खरीदा है। अब अमेरिका की नजरें भारत पर हैं। रक्षा जानकारों की मानें तो अमेरिका चाहता है कि भारत रूस के साथ एस-400 मिसाइल सिस्टम ना खरीदे।
विशेषज्ञों की मानें तो अमेरिका की चिंता इस बात को लेकर है कि एस-400 का उपयोग अमेरिका के लड़ाकू विमानों की गुप्त क्षमताओं का पता लगाने के लिए किया जा सकता है। माना जा रहा है कि इस सिस्टम से भारत को अमेरिकी विमानों का डाटा मिल सकता है। उसे डर है कि यह डाटा रूस या किसी दुश्मन देश को लीक किया जा सकता है। कुछ दिनों पहले ही अमेरिकी प्रशासन ने भारत जैसे अपने सहयोगियों और दोस्तों को रूस के साथ रक्षा सौदों को लेकर छूट प्रदान की थी। लेकिन गुरुवार को
ट्रंप प्रशासन ने कहा कि इस छूट से परहेज की जा सकती है।
एक अमेरिकी अधिकारी ने पत्रकारों से कहा कि एस-400 के संभावित प्राप्तकर्ताओं के लिए हमने अभी तक कार्रवाई का निर्धारण नहीं किया है लेकिन आपको इस बात को लेकर आशवस्त रहना चाहिए कि हमने एस-400 और सुखोई जैसी चीजों की संभावित खरीद पर दुनिया के लोगों से बात करने में बहुत सारा समय खर्च किया है। जो इन्हें खरीदने में दिलचस्पी रखते हैं और जो खरीदना चाहते हैं। नई दिल्ली और मॉस्को अरबों डॉलर वाले एस-400 मिसाइल सिस्टम के सौदे पर रूस के राष्ट्रपति
व्लादिमीर पुतिन की यात्रा के दौरान हस्ताक्षर करने वाले हैं। ऐसा लगता है की सौदे को अंतिम रूप देने के दौरान अमेरिका भारत को परेशान करना चाहता है।