अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने घोषणा की है कि सीरियाई हमलों के खिलाफ अमेरीका को सैन्य कार्रवाई करनी चाहिए।
व्हाइट हाउस में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ये कार्रवाई सीमित समय के लिए और मजबूत तरीके से होगी ताकि भविष्य में रासायनिक हमलों को रोका जा सके।
इस बीच दमिश्क के पास पिछले दिनों रासायनिक हमले से जुड़े आरोपों की जांच कर रहे उन्होंने कहा कि ये कार्रवाई कल भी हो सकती है, अगले हफ्ते भी हो सकती है या फिर निकट भविष्य में कभी भी। लेकिन उनका कहना था कि इसके लिए वो संसद की स्वीकृति लेना चाहेंगे।
संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों ने सीरिया छोड़ दिया है।
सीरिया में सैन्य कार्रवाई की बढ़ती संभावनाओं के बीच संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों की जांच को बेहद अहम माना जा रहा है।
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सीरिया से संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षको के चले जाने के बाद वहां अमरीकी नेतृत्व में सैन्य कार्रवाई के लिए अब राजनीतिक और व्यवहारिक अड़चनें दूर हो गई हैं।
रूस ने मांगा हमलों का सुबूत
रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने अमेरीका से कहा है कि वो संयुक्त राष्ट्र के सामने इस बात के सबूत पेश करे कि रसायनिक हमले के लिए सीरियाई सरकार ही ज़िम्मेदार है।
पुतिन ने कहा कि रासायनिक हमले करके विपक्षियों को भड़काने का कदम उठाना सीरिया की सरकार के लिए बड़ी बेवकूफ़ी होता, वो भी तब जब सीरियाई सेना विरोधियों को ख़िलाफ़ बढ़त हासिल कर रही थी।
पत्रकारों से बातचीत में पुतिन ने कहा, "अमेरीका दावा करता है कि सीरिया की सरकार ने रसायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है और उनके पास सबूत हैं। उन्हें ये सबूत संयुक्त राष्ट्र के हथियार निरीक्षकों और सुरक्षा परिषद के समक्ष पेश करने चाहिए।"
उन्होंने कहा, "सबूतों को ख़ुफ़िया बताकर पेश न करना अंतरराष्ट्रीय गतिविधी में शामिल सहयोगियों के प्रति असम्मान हैं। अगर उनके पास सबूत हैं तो वे पेश किए जाने चाहिए। यदि ये सबूत सामने नहीं आते हैं तो हम यही मानेंगे कि कोई सबूत है ही नहीं।"
राष्ट्रपति पुतिन का ये बयान संयुक्त राष्ट्र के हथियार निरीक्षकों के दल के सीरिया छोड़ने के बाद आया है।
गौरतलब है राजधानी दमिश्क के नज़दीक हुए रसायनिक हमले में बच्चों समैत सैंकड़ों लोग मारे गए थे। अमेरीका का मानना है कि इस रासायनिक हमले के पीछे सीरिया की सरकार है।
दमिश्क से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक सीरिया की सेना अपने हथियारों की स्थिति में बदलाव कर रही है। हमले की संभावना के मद्देनज़र हथियारों को रिहायशी इलाक़ों में ले जाया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक मस्जिदों और स्कूलों में भी हथियार रखे जा रहे हैं।