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अमेरिका को बढ़ाना चाहिए परमाणु हथियारों का जखीरा: ट्रंप

Sat, 24 Dec 2016 03:46 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
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डोनाल़्ड - फोटो : Getty Images
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नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहकर अमेरिका में दशकों से रिपब्लिकन व डेमोक्रेट राष्ट्रपतियों द्वारा परमाणु हथियारों का जखीरा कम करने की कोशिशों पर विराम लगा दिया कि - ‘यूएस को अपनी परमाणु क्षमता बड़ी हद तक आगे बढ़ानी चाहिए।’ अब तक दोनों पार्टियों के राष्ट्रपति अमेरिकी रक्षा व रणनीति में आणविक हथियारों की भूमिका कम करने के पक्ष में थे।
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दोपहर के बाद ट्रंप द्वारा ट्वीट किया गया यह बयान संभवतया रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के उस भाषण के जवाब में दिया गया हो जिसमें पुतिन ने मास्को के सैन्य नेतृत्व से आव्हान किया था कि हमें परमाणु मिसाइल कार्यक्रम को मजबूत करना चाहिए।

पुतिन के बयान पर दुनिया कोई प्रतिक्रिया देती उससे पहले ही ट्रंप ने अमेरिका में परमाणु कार्यक्रम की मजबूती और विस्तार संबंधी ट्वीट कर डाला। यह ट्वीट ओबामा प्रशासन के खिलाफ बड़े नीतिगत बदलाव के संकेत देता है। ओबामा प्रशासन परमाणु हथियारों में कमी लाने और अंतत: उसके खात्मे पर जोर देता रहा है।
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ट्रंप ने अपने ट्वीट में कहा कि - ‘जब तक परमाणु हथियारों के मामले में दुनिया को सद्बुद्धि नहीं आ जाती, तब तक अमेरिका को अपनी परमाणु क्षमताओं को मजबूती और विस्तार देना चाहिए।’ परमाणु हथियारों के मुद्दे पर अपना बयान देने से एक दिन पहले ही ट्रंप ने पेंटागन के शीर्ष जनरलों से मुलाकात की थी। इन जनरलों में रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता एवं परमाणु एकीकरण के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ, वायुसेना के लेफ्टिनेंट जनरल जैक वीनस्टीन भी शामिल थे।

अमेरिका में भी ट्रंप के बयान का हो रहा विरोध

डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी परमाणु हथियारों के प्रसार को लेकर ट्रंप के ट्वीट पर अमेरिकी सांसद जॉन टियरने ने चिंता जताई है। टियरने अमेरिका के हथियार नियंत्रण व अप्रसार केंद्र के कार्यकारी निदेशक भी हैं, उन्होंने कहा कि - ‘महज 140 अक्षरों का इस्तेमाल कर अमेरिका में एक बड़े बदलाव की घोषणा करना नव निर्वाचित राष्ट्रपति के लिए खतरनाक है।

परमाणु हथियार नीति बारीक और जटिल है, धरती के हर इंसान पर असर डालती है।’ उधर मौजूदा परमाणु योजनाओं के आधुनिकीकरण व रखरखाव के बढ़ते खर्च के सामर्थ्य को लेकर पेंटागन पहले ही चिंता जता चुका है।

अमेरिका-रूस में संधि टूटते ही दुनिया में शुरू हो जाएगी हथियारों की होड़
अमेरिकी सांसद जॉन टियरने ने कहा कि ट्रंप का बयान रूस के साथ अमेरिका की प्रमुख हथियार नियंत्रण संधि को उल्लंघन की स्थिति में ला देगा और ऐसा होने पर दोनों देशों में परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो जाएगी। फिलहाल अमेरिका और रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं और उसके बाद ब्रिटेन, फ्रांस और चीन का स्थान है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब दो बड़े देश परमाणु हथियारों में प्रतियोगिता करने लगेंगे तो दुनिया के किसी अन्य देश को भी इस दौड़ से रोका नहीं जा सकेगा। इस दौड़ में ईरान, इस्राइल, सऊदी अरब, पाकिस्तान और कई अन्य देश भी शामिल होंगे।
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पूरी दुनिया में परमाणु बमों की स्थिति

- फोटो : Getty Images
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक -
- 16,300 परमाणु बम है इस वक्त सिर्फ नौ देशों के पास
- 8,000 परमाणु हथियार हैं रूस के पास 
- 7,300 परमाणु बम हैं 1945 में जापान पर दो बम गिराने वाले अमेरिका के पास
- 1960 में फ्रांस के मिली परमाणु तकनीकी, कुल 300 बम हैं उसके पास
- 1964 में पहला परीक्षण करने वाले चीन के पास 250 परमाणु बमों का जखीरा 
- 225 परमाणु हथियार है ब्रिटेन के पास जिसने 1952 में किया था पहला परीक्षण
- 100-120 परमाणु बम हैं पाकिस्तान के पास
- 1974 में पहला परीक्षण कर चुके भारत के पास हैं 90-110 परमाणु बम
- 1948 से 1973 तक अरब देशों से 3 बार युद्ध कर चुके इस्राइल के पास हैं 80 बम
- 2006 में परमाणु परीक्षण करने वाले उत्तर कोरिया के पास हैं 6-10 बम 
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