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सूरज के बूते अमेरिका के पार उड़ा जहाज

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पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलने वाले हवाई जहाज़ ने पूरे अमेरिका की अपनी यात्रा पूरी कर ली है।
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जहाज़ ने भारतीय समयानुसार शनिवार दोपहर 02:26 पर वॉशिंगटन से उड़ान भरी और रविवार सुबह 9.15 पर यह न्यूयॉर्क के जेएफ़के हवाई अड्डे पर उतरा।

जहाज़ की बाएँ डैने के क्षतिग्रस्त होने के कारण स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी के ऊपर से उड़ने की योजना को स्थगित करना पड़ा।

पूरे अमेरिका की यह अंतरमहाद्वीपीय यात्रा मई महीने की शुरुआत में सैन फ्रांसिस्को से शुरू हुई थी। इसमें जहाज़ 70 किमी/प्रति घंटा की अधिकतम रफ़्तार से उड़ा।

चुनौती

अपनी यात्रा में यह सौर ऊर्जा विमान फ़ीनिक्स, एरिज़ोना, डलास, टेक्सस, सेंट लुई, मिसौरी में रुका।

इस सौर ऊर्जा विमान एचबी-एसआईए के पंखों की चौड़ाई एयरबस ए340 जितनी ही है लेकिन इसका वज़न महज़ 1।6 टन है। जबकि पूरी तरह लदे हुए एयरबस ए340 का वज़न 370 टन होता है।
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जहाज़ के पंखों और स्टेबलाइज़रों पर 12,000 सौर सेल लगाए गए हैं। इनसे इसके चार प्रोपेलर चलते हैं और रात की यात्रा के लिए 400 किलो वजनी लीथीयन-आयोन बैटरी चार्ज होती है।

ऐसा पहली बार हुआ है कि सौर ऊर्जा से चलने वाले किसी जहाज़ ने दिन-रात उड़ान भरी है और पूरे अमेरिका की यात्रा की है।

इस सिंगल सीट जहाज़ को एंड्रे बोर्शबर्ग और उनके साथी पायलट बर्टेड पिकार्ड ने बारी-बारी चलाया।

इसकी उड़ान को एक बार में 24 घंटे से कम का ही रखा गया था।

बोर्शबर्ग ने आखिरी उड़ान से पहले बीबीसी को बताया, “हमें इस उड़ान को संभव बनाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी। वॉशिंगटन से कैनेडी हवाई अड्डे तक के दुनिया के सबसे व्यस्त उड़ान मार्ग तक एक प्रायोगिक हवाई जहाज़ को उड़ाना बहुत मुश्किल था।”

जहाज़ के बाएं डैने के नीचे की तरफ़ से फट जाने के चलते यात्रा को छोटा कर दिया गया।

अधिकारियों के अनुसार डैने के क्षतिग्रस्त होने के बावजूद न तो पायलट और न ही जहाज़ को किसी किस्म का कोई ख़तरा था।

बदल जाएगी दुनिया

पूरे अमेरिका की यह यात्रा एचबी-एसआईए प्रोटोटाइप जहाज़ की आखिरी यात्रा होगी।

क्योंकि बोर्शबर्ग और पिकार्ड की योजना 2015 के वसंत में एक बड़े दो सीटों वाले जहाज़, एचबी-एसआईबी, में बैठकर पूरी दुनिया की यात्रा करने की है।

बोर्शबर्ग के अनुसार, “वह उड़ान हमारी अमेरिका की इस यात्रा के मुकाबले काफ़ी मुश्किल होगी। योजना का अनजाना पक्ष बहुत सी तैयारी की मांग करता है।”

वह कहते हैं, “इस प्रचालन तंत्र के साथ अलग-अलग महाद्वीपों में यात्रा करने के बजाय एक देश में एक भाषा बोलने वालों के साथ काम करना यकीनन आसान है।”

एचबी-एसआईए जहाज़ ने पहली अंतर-महाद्वीपीय यात्रा 2012 को की थी। इसके नाम इंसान द्वारा चलाए जाने वाले सौर ऊर्जा विमान की सबसे लंबी यात्रा का विश्व रिकॉर्ड भी है जो 26 घंटे की थी।

अमेरिका यात्रा के दौरान इसने इंसान द्वारा चलाए जाने वाले सौर ऊर्जा विमान की सबसे लंबी यात्रा का रिकॉर्ड भी बनाया।

पिकार्ड और बोर्शबर्ग का स्वच्छ ऊर्जा उत्पाद प्रयास इस परियोजना में भागीदार था। उनकी कोशिश नीति-निर्माताओं और उद्योग को टिकाऊ ऊर्जा तकनीक को अपनाने लिए प्रेरित करना है।
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जहाज़ के वॉशिंगटन पहुंचने पर अमेरिका के ऊर्जा मंत्री अर्नेस्ट मोनिज़ ने कहा, “ऊर्जा विभाग की योजनाएं भी कुछ इसी तरह की नई तकनीक पर केंद्रित हैं जिनका इस्तेमाल इन लोगों ने अपनी उड़ान में किया है। एक ऐसी चीज़ जिसके बारे में कुछ साल पहले तक कोई सोच भी नहीं सकता था।”

उन्होंने कहा, “मुझे यकीन है कि 10 साल बाद दुनिया को बदलने वाली इन तकनीकों का असर दिखने लगेगा।”
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